National Register of Citizens (NRC) – The Hindu

Sansar LochanThe HinduLeave a Comment

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में यह व्यवस्था दी है कि यदि कोई विदेशी न्यायाधिकरण (foreigners tribunal) किसी व्यक्ति को एक अवैध विदेशी घोषित करता है तो वह व्यवस्था बाध्यकारी होगी और असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (National Register of Citizens – NRC) में किसी नाम को डालने अथवा उससे निकालने से सम्बंधित सरकार के निर्णय पर हावी रहेगी.

समीक्षा

  • जिन व्यक्तियों के नाम असम की NRC में नहीं हैं तो वे अपने वंशवृक्ष से सम्बंधित तथा अन्य दस्तावेज प्रस्तुत कर न्यायाधिकरण के निर्णय की समीक्षा की माँग कर सकते हैं.
  • सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार विदेशी न्यायाधिकरण के द्वारा अवैध विदेशी घोषित किसी व्यक्ति के लिए वह संविधान की धारा 142 में दी गई शक्ति का प्रयोग करते हुए एक अपीलीय मंच का निर्माण नहीं कर सकता है.

अब क्या होगा?

यदि असम की NRC में अंकित किसी व्यक्ति का नाम उसके विदेशी होने के आधार पर विलोपित हो जाता है तो विदेशी न्यायाधिकरण के निर्णय पर ‘res-judicata’ का सिद्धांत लागू होगा अर्थात् न्यायिक निर्णय हो जाने के उपरान्त मामले को दुबारा खोला नहीं जा सकता. इस प्रकार जो व्यक्ति अवैध आव्रजक घोषित हो गया है वह फिर से निर्णय लेने की अपील नहीं कर सकता है.

विदेशी न्यायाधिकरण क्या है?

  • विदेशी न्यायाधिकारण की स्थापना भारत सरकार के द्वारा विदेशी न्यायाधिकरण अधिनियम, 1946 के अनुभाग 3 के अंतर्गत पारित विदेशी (न्यायाधिकरण) आदेश, 1964 के अधीन की गई थी.
  • विदेशी न्यायाधिकरण अधिनियम, 1946 में दी गई परिभाषा के अंतर्गत कौन व्यक्ति विदेशी है अथवा नहीं है, इसका निर्णय लेने के लिए भारत सरकार जब कभी आवश्यक हो तो विदेशी न्यायाधिकरण गठित कर सकती है.
  • गठन : विदेशी न्यायाधिकरण में न्यायिक अनुभव वाले ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें सरकार नियुक्ति के लिए योग्य मानती है.
  • शक्तियाँ : किसी मामले पर सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अधीन सुनवाई करते समय न्यायाधिकरण के पास व्यवहार न्यायालय की सभी शक्तियाँ होंगी. दूसरे शब्दों में यह न्यायाधिकरण किसी भी व्यक्ति को बुला सकता है, कोई भी दस्तावेज माँग सकता है और किसी गवाह के परीक्षण के लिए आदेश दे सकता है.

NRC की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई?

राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) वह सूची है जिसमें असम में रहने वाले भारतीय नागरिकों के नाम दर्ज हैं. असम देश का एकमात्र राज्य है जहाँ NRC विद्यमान है. असम में विदेशियों के निष्कासन के लिए 1979 से 1985 तक एक बड़ा आन्दोलन चला था. 1985 में सरकार और आन्दोलनकारियों के बीच एक समझौता हुआ जिसके बाद आन्दोलन समाप्त कर दिया गया. समझौते में यह आश्वासन दिया गया था कि NRC का नवीकरण किया जायेगा. इस समझौते (Assam Accord) में 24 मार्च, 1971 को विदेशियों के पहचान के लिए cut-off तिथि निर्धारित की गई थी. इस आधार पर NRC ने अपना नवीनतम प्रारूप प्रकाशित किया है जिसमें बताया गया है कि राज्य के 40 लाख लोग यह प्रमाणित नहीं कर सके कि वे इस cut-off तिथि के पहले से वहाँ रह रहे हैं.

NRC 

  • NRC को पूरे देश में पहली और आखिरी बार 1951 में तैयार किया गया था.
  • लेकिन इसके बाद इसे update नहीं किया गया था.
  • NRC में भारतीय नागरिकों का लेखा-जोखा दर्ज होता है.
  • 2005 में केंद्र, राज्य और All Assam Students Union के बीच समझौते के बाद असम के नागरिकों की दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई. ये पढ़ें >> असम समझौता
  • मौजूदा प्रकिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रही है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने करीब दो करोड़ दावों की जांच के बाद 31 December तक NRC को पहला draft जारी करने का निर्देश दिया था.
  • कोर्ट ने जांच में करीब 38 लाख लोगों के दस्तावेज संदिग्ध पाए थे.

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