रसायन विज्ञान के लिए नोबेल पुरस्कार 2022

Richa KishoreScience TechLeave a Comment

रसायन विज्ञान (Chemistry) में वर्ष 2022 के नोबेल पुरस्कार के विजेता कैरोलिन आर. बर्टोज़ी/Carolyn R. Bertozzi (यूएस), मॉर्टेन मेल्डल/Morten Meldal (डेनमार्क) और के. बैरी शार्पलेस/K. Barry Sharpless (यूएस) हैं। तीनों वैज्ञानिकों को क्लिक केमिस्ट्री एवं बायो ओर्थोगोनल केमिस्ट्री पर किये गये उनके कामों के लिए पुरस्कृत किया जा रहा है।

Molecule-Building Innovators Win 2022 Chemistry Nobel Prize | Quanta  Magazine

Carolyn R. Bertozzi (Stanford University, CA, USA), Morten Meldal (University of Copenhagen, Denmark) and K. Barry Sharpless (Scripps Research, La Jolla, CA, USA)

खोज के बारे में

इस वर्ष के पुरस्कार विजेताओं ने अपने काम के माध्यम से प्रयोगशाला या उद्योग में नए जटिल अणुओं के उत्पादन के लिए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण अपनाया, जो अभिक्रियाओं में अपशिष्टों को कम करता है और समग्र दक्षता बढ़ाता है। विशेषकर फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में, जो प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले लेकिन औद्योगिक रूप से संश्लेषित अणुओं का बहुत उपयोग करता है, एक दवा के प्रत्येक किलोग्राम के निर्माण में लगभग 25-100 किलोग्राम रासायनिक अपकशिष्ट उत्पन्न होता है।

लगभग 40 वर्षों से फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में प्रयुक्त की जा रही एक रासायनिक प्रतिक्रिया में बैरी शार्पलेस ने एक संशोधन किया। यह अभिक्रिया नाइट्रोजन युक्त चक्रीय यौगिक का उत्पादन करने के लिए थी, जिसका उपयोग फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में विभिन्न अणुओं के लिए एक बिल्डिंग ब्लॉक के रूप में किया जाता था। पारम्परिक प्रक्रिया में कई उप-उत्पादों का भी उत्पादन हो जाता था। शार्पलेस ने पाया कि उत्प्रेरक के रूप में तांबे (Copper) के उपयोग ने उप-उत्पादों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया और केवल वांछित रसायन का उत्पादन किया।

लगभग इसी समय मॉर्टेन मेल्डल भी स्वतंत्र रूप से इसी तरह की क्लिक केमिस्ट्री पर कार्य रहे थे और उन्हें भी अपने कार्य में सफलता मिली। इनके निष्कर्षों के आधार पर अन्य अनुसंधानकर्ताओं ने भी कई क्लिक अभिक्रियाएँ विकसित की।

क्लिक केमिस्ट्री एवं बायो ओर्थोगोनल अभिक्रिया क्या हैं?

क्लिक केमिस्ट्री की अवधारणा वर्ष 2000 के आस-पास बैरी शार्पलेस द्वारा दी गई थी। क्लिक कैमेस्ट्री समान व्यवहार रखने वाले छोटे-छोटे मॉलिक्यूल्स को जोड़ने की प्रक्रिया है। 20 वर्ष पहले वैज्ञानिकों के सामने यही सबसे बड़ी चुनौती थी कि अणु बिना एक-दूसरे से प्रतिक्रिया किए आपस में जुड़ नहीं सकते. मॉर्टेन मेल्डल और बैरी शार्पलेस ने अलग-अलग स्तर पर स्वतंत्र रूप से, इन्हें जोड़ने के लिए ऐसे केमिकल एजेंट्स की खोज की, जो कि अणुओं से जुड़ सकते थे और फिर एक के बाद एक अन्य अणुओं को भी जोड़कर अणुओं का जटिल गुच्छा बना सकते थे। इन्हें “केमिकल बकल्स” (chemical buckles) कहा गया। इन बकल्स की खासियत यह थी कि यह खास तरह के अणु से ही जुड़ सकते थे, न कि हर तरह के अणु से। इन्हें वैज्ञानिक अपनी तरह से मॉडिफाई भी कर सकते हैं, ताकि अलग-अलग तरह के अणुओं को जोड़ कर उनकी लंबी चेन बनाई जा सके।

इस क्लिक केमिस्ट्री के जरिए आज अणुओं को जोड़कर इनका बड़ा और जटिल ढांचा तैयार किया जा रहा है। इनका प्रयोग दवा बनाने से लेकर पॉलीमर और नए पदार्थ बनाने में किया जा रहा है।

वर्ष 2004 में  कैरोलिन आर. बर्टोज़ी ने दिखाया कि क्लिक केमिस्ट्री जीवित कोशिकाओं में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं में भी काम कर सकती है। उन्होंने कुछ ‘बायोऑर्थोगोनल अभिक्रियाएँ’ विकसित कीं जो जीवित जीवों के अंदर काम करती हैं।

क्लिक केमिस्ट्री और बायोऑर्थोगोनल अभिक्रियाओं का प्रयोग भविष्य में इंसानों और अन्य जीवों के शरीर में ऐसे मॉलिक्यूल्स बनाने में होगा, जो उन्हें निरोग रख सकें। बर्टोजी के तरीके, जिन्हें उन्होंने वर्षों से बार-बार परिष्कृत किया है, ने उन्नत कैंसर के इलाज की क्षमता प्रदर्शित की है। उनके दृष्टिकोण पर आधारित कैंसर की दवाओं का अब क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है।

Tags: Chemistry, Nobel prize 2022, Bioorthogonal chemistry, click chemistry in Hindi, nobel prize winners.

Click for – Science Notes in Hindi for UPSC

Read them too :
[related_posts_by_tax]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.