[Sansar Editorial] नीति आयोग के कार्य, उद्देश्य, महत्ता और इसके समक्ष चुनौतियाँ

RuchiraSansar Editorial 20181 Comment

हाल ही में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने तीन प्रमुख क्षेत्रों – स्वास्थ्य, शिक्षा और बच्चों के स्वास्थ्य के विषय में विशेष कार्रवाई करने की आवश्यकता जतलाई है. आज हम नीति आयोग के विषय में गहराई से जानने की कोशिश करेंगे और साथ ही इसके कार्य, उद्देश्य और महत्त्व के विषय में चर्चा करेंगे. यह भी जानेंगे कि नीति आयोग के समक्ष क्या-क्या चुनौतियाँ हैं?

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नीति आयोग

राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्था (The National Institution for Transforming India : NITI आयोग) का गठन 1 जनवरी, 2015 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव के माध्यम से किया गया था. यह भारत के एक प्रमुख नीतिगत “थिंक टैंक” के रूप में उभरा है, जो सहकारी संघवाद की भावना को बढ़ावा देता है.

कार्य

सहकारी संघवाद” को संदर्भित करने वाले प्रमुख कार्य निम्लिखित हैं –

  • राष्ट्रीय उद्देश्यों को दृष्टिगत रखते हुए राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं, क्षेत्रों तथा रणनीतियों का एक साझा दृष्टिकोण विकसित करना.
  • सशक्त राज्य ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है इस तथ्य की महत्ता को स्वीकारते हुए राज्यों के साथ सतत आधार पर संरचनात्मक सहयोग की पहल और तन्त्र के माध्यम से सहयोगपूर्ण संघवाद (federalism) को बढ़ावा देना.

अन्य उद्देश्य

  • ग्रामीण स्तर पर विश्वसनीय योजना तैयार करने के लिए तन्त्र (mechanism) विकसित करना.
  • आर्थिक प्रगति के लाभों से वंचित समाज के वंचित वर्गों पर विशेष ध्यान केन्द्रित करना.
  • रणनीतिक और दीर्घकालिक नीति की रूपरेखाओं का निर्माण तथा उनकी प्रगति एवं क्षमताओं की निगरानी करना.
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, पेशेवरों तथा अन्य हितधारकों के एक सहयोगात्मक समुदाय के माध्यम से ज्ञान, नवाचार और उद्यमिता समर्थन प्रणाली का सृजन करना.

नीति आयोग का महत्त्व

सहकारी संघवाद

नीति आयोग की कार्यप्रणाली में राज्य सरकारों को प्रमुखता प्रदान की गई है तथा यह केन्द्रीय मंत्रालयों तथा राज्यों एवं केंद्रशाषित प्रदेशों के मध्य मुद्दों के समाधान की प्रक्रिया को भी गति प्रदान करता है.

प्रतिस्पर्द्धात्मक संघवाद

नीति आयोग द्वारा विकसित सूचकांकों में राज्यों के मध्य बेहतर प्रदर्शन हेतु प्रतिस्पर्द्धा विद्यमान है. ये सूचकांक महत्त्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों जैसे कि डिजिटल परिवर्तन सूचकांक, नवाचार सूचकांक, स्वास्थ्य सूचकांक इत्यादि में वृद्धिशील वार्षिक परिणामों का मापन करते हैं.

समावेशी विकास पर फोकस

इसने 115 आकांक्षी जिलों (aspirational districts) के रूपांतरण पर ध्यान केन्द्रित करते हुए एक विशेष पहल प्रारम्भ की है. नीति आयोग सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन की निगरानी हेतु एक नोडल निकाय भी है.

साक्ष्य आधारित नीति निर्माण

यह पर्याप्त आँकड़ों पर आधारित नीति निर्माण पर ध्यान केन्द्रित करता है. जैसे कि इसने तीन-वर्षीय कार्य एजेंडा, समग्र जल प्रबंधन सूचकांक, भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) इत्यादि पर आधारित योजना निर्माण का प्रोत्साहन दिया है.

आर्थिक सुधार

इसने कृषि उत्पाद विपणन समिति अधिनियम (APMC Act), उर्वरक क्षेत्र के कायाकल्प, किसानों की आय में वृद्धि, मॉडल एग्रीकल्चर लैंड लीजिंग एक्ट आदि में सुधारों पर नीतिगत प्रकाशित किया है.

ज्ञान एवं नवाचार केंद्र

यह एक सूचना कोष (रिपोजिटरी) के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह सभी राज्यों में सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के संकलन, संचारण तथा अनुकरण करवाने में संग्लन है. नीति आयोग ने अटल इनोवेशन मिशन भी आरम्भ किया है. इसके द्वारा वैश्विक उद्यमिता शिखर सम्मेलन, 2017 का भी आयोजन किया गया था.

संतुलित क्षेत्रीय विकास

जैसे कि उत्तर-पूर्व जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केन्द्रित करना. उदाहरणार्थ : पूर्वोत्तर के लिए नीति फोरम, जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र (NER) के त्वरित, समावेशी और सतत आर्थिक विकास के मार्ग में आने वाले विभिन्न अवरोधों की पहचान करना है. इस नीति फोरम की सह-अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा की जाती है.

नीति आयोग के समक्ष चुनौतियाँ

कार्यों का अतिव्यापन

सौंपे गये कार्यों के निर्वहण में नीति आयोग के कार्यक्षेत्र अंतर-राज्य परिषद् के कार्यक्षेत्र से कहीं-कहीं टकरा जाता है. ज्ञातव्य है कि अन्तर-राज्य परिषद् एक संवैधानिक निकाय है. वर्तमान में अंतर-विभागीय समन्वय की जिम्मेदारी कैबिनेट सचिव के कार्यालय पर होती है और उसके लिए समन्वय प्राप्त करना मुश्किल हो जाता है.

समृद्ध राज्यों का पक्ष

प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद को प्रोत्साहन देने से पहले से ही समृद्ध राज्यों को अधिक लाभ हो सकता है जबकि पिछड़े राज्यों को हानि हो सकती है.

सांविधिक प्रकृति का अभाव

इसे एक कार्यपालिका प्रस्ताव द्वारा स्थापित किया गया है, जिससे इसमें सहकारी हस्तक्षेप की अत्यधिक संभावना है.

सक्रिय कार्यवाही योग्य लक्ष्यों का अभाव

इसे कुछ चुनौतियों के समाधान हेतु (जिनका आज भारत सामना कर रहा है) सक्रिय उपाय करने की आवश्यकता है जैसे कि रोजगार के अवसरों का सृजन, आर्थिक विकास में वृद्धि आदि. यहाँ तक कि इसका तीन-वर्षीय कार्यवाही एजेंडा भी आने वाली चुनौतियाँ हेतु अतिविस्तारित दृष्टिकोण रखता है.

कार्यान्वयन पर सीमित फोकस

यह अपनी अनुशंसाओं के व्यावहारिक पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता है जैसे कि नौकरशाहों के उत्तरदायित्वों का निर्धारण, सरकार-नागरिक अन्तः-क्रिया (interaction) इत्यादि. ये इसके द्वारा प्रस्तुत अनुशंसाओं के लिए अत्यावश्यक हैं किन्तु इन पहलुओं पर ध्यान न दिए जाने से ये अनुशंसाएँ मात्र दस्तावेजों में दर्ज रह जाती हैं.

निष्कर्ष

सहकारी संघवाद से आगे बढ़ते हुए आज “प्रतिस्पर्द्धात्मक सहकारी संघवाद” केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों को परिभाषित करता है. नीति आयोग ने भारत में परिवर्तन के संचालन का दायित्व राज्यों को सौंपा है. भारत सतत विकास लक्ष्य, 2030 (SDGs 2030) प्राप्त करने के मार्ग में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. केंद्र सरकार ने कई मिशन मोड कार्यक्रम प्रारम्भ किये हैं, जैसे कि स्मार्ट सिटी, कौशल भारत-कुशल भारत, स्वच्छ भारत, सभी के लिए आवास और बिजली आदि. इन सभी की सफलता केंद्र और राज्यों के बीच सक्रिय सहयोग एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा पर निर्भर करती है. नीति आयोग इस सहयोग की प्राप्ति में उत्प्रेरक की भूमिका निभाने हेतु तैयार है.

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