Mock Test Series for UPSC Prelims – भूगोल (Geography) Part 2

Sansar LochanMT GeographyLeave a Comment

UPSC Prelims परीक्षा, 2020-21 के लिए भूगोल (Geography) का Mock Test Series का पहला भाग दिया जा रहा है. भाषा हिंदी है और सवाल (MCQs) 10 हैं. ये questions Civil Seva Pariksha के समतुल्य हैं इसलिए यदि उत्तर गलत हो जाए तो निराश मत हों.

Mock Test Series for UPSC Prelims – Geography (भूगोल) Part 2

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Question 1
निम्नलिखित भू-आकृतियों पर विचार कीजिए:
  1. स्टैलेग्माइट
  2. धोलरंध्र
  3. युवाला
  4. लेपीस
उपर्युक्त भू-आकृतियों में से कौन-सी भौम जल की गतिविधियों द्वारा निर्मित अपरदनात्मक भू-आकृतियाँ हैं?
A
केवल 1 और 4
B
केवल 2 और 3
C
केवल 2, 3 और 4
D
1, 2, 3 और 4
Question 1 Explanation: 
भौम जल द्वारा पदार्थों के भौतिक या यांत्रिक परिवहन का प्रभाव स्थलख्पों के निर्माण के संदर्भ में नगण्य होता है। इसी के कारण भौम जल के कार्य का परिणाम सभी प्रकार की चट्टानों में नहीं देखा जा सकता है। किन्तु चूना पत्थर या डोलोमाइट जैसी चट्टानों (जिनमें कैल्शियम कार्बोनेट की प्रधानता होती है) में धरातलीय एवं भौम जल रासायनिक प्रक्रिया (घोलीकरण एवं अवक्षेपण) द्वारा अनेक स्थलरूपों का विकास करता है। चूना पत्थर या डोलोमाइट चट्टानों के किसी भी क्षेत्र में भौम जल की घुलनप्रक्रिया और निक्षेपण प्रक्रिया से बनी ऐसी भू- आकृतियों को कार्स्ट स्थलाकृति कहा जाता है। यह नाम एड्रियाटिक सागर के साथ बाल्कन में कार्स्ट क्षेत्र में उपस्थित लाइमस्टोन चट्टानों पर विकसित विशिष्ट स्थलाकृतियों पर आधारित है। कार्स्ट स्थलाकृति भी अपरदनात्मक स्थलाकृतियों की ही विशेषता है: ०. विलयन रंध्र : इसे घोलरंध्र के रूप में भी जाना जाता है। घोलरंध्र, चूनापत्थर की सतह पर विलयन प्रक्रिया के माध्यम से बने उथले गर्तनुमा कीप की आकृति के गर्त होते हैं। ० डोलाइन: यह ध्वस्त घोलरंध्र को संदर्भित करता है। ० युवाला : जब घोलरंध और डोलाइन इन कंदराओं की छत के गिरने से या पदार्थों के स्खलन द्वारा आपस में मिल जाते हैं तो लम्बी, तंग तथा विस्तृत खाइयाँ बनती हैं जिन्हें घाटी रंध्र या युवाला कहते हैं। ० लेपीस : इन कटकों या लेपीस का निर्माण चट्टानों की संधियों में भिन्नतापूर्ण घुलन प्रक्रियाओं द्वारा होता है। कभी - कभी लेपीस के ये विस्तृत क्षेत्र सममतल चुना युक्त चबूतरों में परिवर्तित हो जाते हैं। ***निक्षेपित स्थलरूप***** ० स्टैलेक्टाइट्स : ये कंदरा की छत से लटकते हुए हिमस्तम्भ के समान और विभिन्न व्यासों के होते हैं। प्राय: ये आधार पर या कन्दरा की छत के पास मोटे होते हैं और छोर पर पतले होते हैं। ०. स्टैलेग्माइट : ये कंदराओं की फर्श से ऊपर की तरफ बढ़ते हैं। वास्तव में, स्टैलेग्माइट कंदराओं की छत से धरातल पर टपकने वाले चूना मिश्रित जल से बनते हैं या स्टैलेक्टाइट के ठीक नीचे पतले पाइप की आकृति में बनते हैं। ० स्तम्भ: स्टैलेग्माइट और स्टैलेक्टाइट के मिलने से अंततः विभिन्न व्यास के स्तंभों का निर्माण होता है। इसलिए विकल्प (c) सही उत्तर है।
Question 2
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से पश्चिमी विक्षोभों के संदर्भ में सही है/हैं?
  1. ये पूर्वी सागर के ऊपर उत्पन्न होने वाले हल्के चक्रवातीय अवदाब हैं.
  2. रात के सामान्य तापमान में अचानक गिरावट भारत में इनके आगमन का संकेत देती है.
  3. ये उत्तरी भारत में रबी की फसलों हेतु अत्यधिक लाभप्रद होते हैं.
नीचे दिए गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए.
A
केवल 1 और 2
B
केवल 2
C
केवल 1 और 3
D
1, 2 और 3
Question 2 Explanation: 
पश्चिमी विक्षोभ: ये चक्रवाती अवदाब (कमजोर समशीतोष्ण चक्रवात) होते हैं, जो पूर्वी विषुवत सागर पर उत्पन्न होते हैं तथा और पूर्व की ओर चलते हुए पश्चिम एशिया, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को पार करके भारत के उत्तर-पश्चिमी भागों में पहुँचते हैं। इसलिए कथन 1 सही है। इन आवदाबों को पश्चिमी जेट स्ट्रीम द्वारा भारत की ओर उन्मुख किया जाता है। इनके मार्ग में उत्तर में पड़ने वाले कैस्पियन सागर और दक्षिण में पड़ने वाली फारस की खाड़ी से इनकी आर्द्रता की मात्रा में वृद्धि हो जाती है। यद्यपि इनके द्वारा अल्प मात्रा में वर्षा होती है, इसके बावजूद ये रबी की फसल के लिए अत्यधिक लाभप्रद होते हैं। इसलिए कथन 3 सही है। ये गर्मियों के महीनों में हिमालयी नदियों में जल के प्रवाह को बनाए रखते हैं। रात के सामान्य तापमान में वृद्धि आम तौर पर इन चक्रवातों के आगमन का संकेत देती है। इसलिए कथन 2 सही नहीं है।
Question 3
भारतीय भूगोल के संदर्भ में, करेवा (Karewa) है -
A
कश्मीर हिमालय में हिमनद चिकनी मिट्टी और दूसरे पदार्थों का हिमोढ़ पर मोटी परत के रूप में जमाव.
B
भारत के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में सिन्धु की सहायक नदियों द्वारा निर्मित जलोढ़ पंख.
C
हिमालय की तलहटी में निम्नस्तरीय अपवाह युक्त, आर्द्र और सघन वनों की संकीर्ण पट्टी.
D
थार रेगिस्तान में विद्यमान मरुद्यान
Question 3 Explanation: 
करेवा हिमनदीय चिकनी मिट्टी और हिमोढ़ के साथ संबद्ध अन्य पदार्थों का मोटी परत के रूप में जमाव हैं। अधिक सटीक रूप से, करेवा सरोवरी निक्षेप हैं। भूगोलवेत्ताओं के अनुसार, करेवा का निर्माण प्लियो-प्लीस्टोसीन युग में हिमतदों-नदियों-झीलों और पवनों द्वारा लाए गए लोएस से हुआ है। कश्मीर हिमालय करेवा सरचनाओं के लिए भी प्रांसंद्ध है, जा केसर की स्थानौय कैस्म ज़ाफ़रान की खेतों के लिए उपयागी है। ये उत्तर पश्चिम भारत में पीर पंजाल श्रेणी और वृहद्‌ हिमालय श्रेणी के मध्य स्थित हैं। इसलिए विकल्प (a) सही उत्तर है।
Question 4
प्लेटो की निम्नलिखित सीमाओं में से किस पर/किन पर नई भूपर्पटी का निर्माण होता है?
  1. अभिसरण सीमा (Convergent Boundaries)
  2. अपसारी सीमा (Divergent Boundaries)
  3. रूपान्तर सीमा (Transform Boundaries)
नीचे दिए गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए.
A
केवल 1 और 2
B
केवल 2
C
केवल 1 और 3
D
1, 2 और 3
Question 4 Explanation: 
प्लेट संचरण के फलस्वरूप तीन प्रकार की प्लेट सीमाएं निर्मित होती हैं:>>> अभिसरण सीमा : जहां एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धँसती है और भूपर्पटी नष्ट होती है, बह अभिसरण सीमा होती है। वह स्थान जहाँ प्लेट धँसती है, उसे प्रविष्ठन क्षेत्र (subduction zone) भी कहा जाता है। अभिसरण तीन प्रकार से हो सकता हैं: महासागरीय और महाद्वीपीय प्लेट के बीच; (i) दो महासागरीय प्लेटों के बीच; और (ii) दो महाद्वीपीय प्लेटों के बीच। >>अपसारी सीमा : जब दो प्लेटें एक दूसरे से विपरीत दिशा में अलग हटती हैं तब एक नई पर्पटी का निर्माण होता है, ऐसी प्लेटों को अपसारी प्लेट कहते हैं। वह स्थान जहाँ से प्लेटें एक-दूसरे से दूर हटती हैं प्रसारी स्थान कहलाता है। अपसारी सीमाओं का सर्वोत्तम उदाहरण मध्य-अटलांटिक कटक है। यहाँ से, अमेरिकी प्लेट/प्लेटें, यूरेशियन व अफ्रीकी प्लेटों से अलग हो रही है/हैं। >>>रूपान्तर सीमा: यहां न तो नई पर्पटी का निर्माण होता है और न हा पर्पटी का विनाश होता है, क्‍योंकि प्लेटें एक-दूसरे के साथ-साथ क्षैतिज दिशा में सरक जाती हैं। रूपांतर भ्रंश दो प्लेटों को पृथक करने वाले तल हैं जो सामान्यतः: मध्य-महासागरीय कटकों से लंबवत स्थिति में पाए जाते हैं। क्योंकि कटकों के शीर्ष पर एक ही समय में सभी स्थानों पर ज्वालामुखी उद्भार नहीं होते हैं, इसलिए पृथ्वी के अक्ष से दूर प्लेट के हिस्से भिन्न प्रकार से गति करते है। इसके अतिरिक्त, पृथ्वी के घूर्णन का भी प्लेट के अलग खंडों पर भिन्न प्रभाव पड़ता है।
Question 5
रटेन और लियाना कुछ विशिष्ट प्रकार की वनस्पतियों के प्रकार हैं, ये निम्नलिखित में किस जलवायु प्रदेश में पाई जाती है?
A
उष्ण मरुस्थलीय क्षेत्र में
B
शीतोष्ण घासभूमियों में
C
आर्कटिक क्षेत्र में
D
विषुवतरेखीय क्षेत्र में
Question 5 Explanation: 
उष्ण और आर्द्र विषुवतरेखीय क्षेत्रों में उच्च तापमान और प्रचुर मात्रा में वर्षण विभिन्न प्रकार की सघन वनस्पतियों - उष्कणटिबंधीय वर्षा वन के विकास में सहायता प्रदान करते हैं। यहां मौसम वर्षपर्यंत आर्द्र होता है जिसके कारण यहां विकसित वनों की प्रकृति सदाबहार होती है। अमेज़न उष्णकटिबंधीय वर्षा वनों को इसके हरे-भरे और चौड़े पत्तों वाले वृक्षा के कारण सेल्वास के नाम से जाना जाता है। इस क्षेत्र की वनस्पति में सदाबहार वृक्ष बहुतायत में शामिल हैं जो उष्णकटिबंधीय कठोर काष्ठ जैसे महोगनी, आबनूस, रोजबुड, कैबिनेट वुड आदि वनोपज प्रदान करते हैं। इसमें छोटे ताड़ के पेड़ और लिआना व रटेन जैसे आरोहण करने वाले पौधे भी पाये जाते हैं, जो अधिपादप (एक पौधा जो दूसरे पौधे पर उगता है और अवलंबन हेतु उस पर निर्भर करता है किन्तु भोजन हेतु नहीं) कहलाते हैं। वृक्षों के नीचे, फ़र्न, ऑर्किड और लालंग की प्रजातियां भी विकसित होती हैं। इससे वनों में एक अलग परत का निर्माण होता है, जिसके शीर्ष पर ऊंचे वृक्ष और उनका सघन वितान होता है, जबकि मध्य स्तर पर छोटे वृक्ष पाये जाते हैं तथा भूमि पर शाकीय फर्न और झाड़ियां विस्तृत होती हैं। इस तरह की वनस्पतियों में एकल प्रजातियों के वृक्षों की उपलब्धता अत्यंत दुर्लभ है। इसलिए उष्णकटिबंधीय काष्ठ का वाणिज्यिक दोहन अत्यधिक दुष्कर होता है। इसलिए विकल्प (d) सही उत्तर है।
Question 6
उर्मिल (रोलिंग) पर्वतों की भूमि के रूप में ज्ञात यह क्षेत्र पर्वतों के समानांतर निर्मित उच्च अंतरीप बेसिनों (घाटी के जैसे गर्तों) के साथ सहगत है. इन गर्तों में विस्तृत रूप से मृदु असंगठित निक्षेप जमा हैं, जिनसे मोलेसिस बेसिन का निर्माण होता है. उपर्युक्त गद्यांश में किस भारतीय राज्य को वर्णित किया जा रहा है?
A
असम
B
मणिपुर
C
लद्दाख
D
मिजोरम
Question 6 Explanation: 
मिजोरम को उर्मिल (रोलिंग) पर्वतों की भूमि के रूप में जाना जाता है क्‍योंकि यहां पर्वतों की विशाल संख्या मौजूद है। अधिकांश पर्वत उच्च अंतरीप बेसिन की संरचना या साधारण शब्दों में घाटी प्रकार के गर्त के साथ सहगत हैं, जो पर्वतों के समानांतर स्थित हैं। इन गर्तों में असंगठित निक्षेप संचित हो जाते हैं जिन्हें मोलेसिस बेसिन के रूप में जाना जाता है। इसलिए इसे भारत के मोलेसिस बेसिन के रूप में भी जाना जाता है।
Question 7
हाल ही में, महाराष्ट्र में लोनार झील का रंग गुलाबी रंग में परिवर्तित हो गया. इस संदर्भ में, निम्नलिखित में से किन कारणों से रंग में परिवर्तन हो सकता है?
A
केंकड़ों की एक प्रजाति द्वारा उत्सर्जित विषाक्त पदार्थ
B
नदियों द्वारा प्रवाहित औद्योगिक बहिःस्त्रवणों के कारण प्रदूषण स्तर में वृद्धि
C
झील में गिरने वाली उल्कापिंड की धूल के कारण होने वाली रासायनिक अभिक्रिया
D
शैवाल के व्यवहार में परिवर्तन
Question 7 Explanation: 
हाल ही में, लगभग 50000 वर्ष पूर्व पृथ्वी पर उल्कापिंड के टकराने से निर्मित महाराष्ट्र की लोनार झील के जल का रंग गुलाबी रंग में परिवर्तित हो गया है। विशेषज्ञों द्वारा इसके लिए जल निकाय में लवणता और शैवाल की उपस्थिति को उत्तरदायी ठहराया जा रहा है। मुंबई से लगभग 500 कि.मी. दूर बुलढ़ाणा जिले में स्थित लोनार झील एक लोकप्रिय पर्यटन केंद्र है और साथ ही विश्व भर के वैज्ञानिकों को भी आकर्षित करती है। हाल ही में, 1.2 कि.मी. औसत व्यास वाली झील के जल के रंग में परिवर्तन ने न केवल स्थानीय लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्साही लोगों और वैज्ञानिकों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। इस अधिसूचित राष्ट्रीय भू-धरोहर स्मारक झील के जल का pH 10.5 है। इस जल निकाय में शैवाल भी विद्यमान हैं। इस परिवर्तन के लिए लवणता और शैवाल उत्तरदायी हो सकते हैं। झील के जल की सतह से एक मीटर नीचे ऑक्सीजन का अभाव है। ईरान में भी ऐसी झील का एक उदाहरण है, जिसमें लवणता बढ़ने के कारण जल का रंग लाल हो जाता है। जल के निन्न स्तर के कारण लवणता बढ़ सकती है और वायुमंडलीय परिवर्तनों के कारण शैवालों के व्यवहार में परिवर्तन रंग में परिवर्तन का कारण हो सकता है। प्राकृतिक परिघटना की स्थिति में, कवक के कारण सामान्यतः जल का रंग हरा होता है। यह (वर्तमान रंग परिवर्तन) संभवत: लोनार क्रेटर में जैविक परिवर्तन के कारण हो सकता है।
Question 8
आग्नेय चट्टानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
  1. इनका निर्माण पृथ्वी की सतह के साथ-साथ गहराई में भी हो सकता है.
  2. ये जीवाश्म रहित होती हैं.
  3. क्वार्टजाइट और ग्रेनाइट आग्नेय चट्टानें हैं.
नीचे दिए गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए -
A
केवल 1 और 2
B
केवल 2 और 3
C
केवल 1
D
1, 2 और 3
Question 8 Explanation: 
चट्टानों के विभिन्न प्रकारों को इनकी निर्माण की विधि के आधार पर तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है। जो निम्नलिखित हैं: आग्रेय चट्टानें: पृथ्वी के आंतरिक भाग के मैग्मा और लावा से आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है, इसलिए उन्हें प्राथमिक चट्टानों के रूप में जाना जाता है। आग्रेय चट्टानों (आग्रेय लैटिन भाषा के इग्निस शब्द से बना है जिसका अर्थ अग्नि होता है।) का निर्माण मैग्मा के शीतल होकर घनीभूत होने पर होता है। जब मैग्मा उर्ध्वगामी गति में शीतल होकर ठोस रूप में परिवर्तित हो जाता है तो इसे आग्रेय चट्टान कहा जाता है। शीतलन और घनीभूत होने की प्रक्रिया पृथ्वी की पर्पटी (crust) के अंदर (प्लूटोनिक या पातालीय चट्टान) या पृथ्वी की सतह पर (ज्वालामुली चट्टानें) हो सकती है। इसलिए कथन 1 सही है। आग्रेय चट्टानों में किसी भी प्रकार का जीवाश्म नहीं पाया जाता हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब मूल चट्टान पिघलकर मैग्मा में परिवर्तित हुई होगी तब उसमें विद्यमान किसी भी प्रकार का जीवाश्म भी पिघल गया होगा। इसलिए कथन 2 सही है। आग्रेय चट्टानों को संघटन के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। इनका संघटन इसके कणों के आकार एवं व्यवस्था अथवा पदार्थ की भौतिक अवस्थाओं पर निर्भर करता है। यदि पिघले हुए पदार्थ धीरे-धीरे गहराई तक शीतल होते हैं, तो खनिज के कण पर्याप्त वुहत हो सकते हैं। सतह पर आकस्मिक शीतलन के परिणामस्वरूप लघु एवं चिकने कणों का निर्माण होता है। शीतलन की मध्यम दशाएं होने पर आग्रेय चट्टानों के निर्माण करने वाले कणों का आकार मध्यम हो सकता है। ग्रेनाइट, गैब्रो, पेग्मेटाइट, बेसाल्ट, ज्वालामुखीय ब्रैशिया और टफ़ आग्रेय चट्टानों के कुछ उदाहरण हैं। >>कायांतरित चट्टानें: ये विद्यमान चट्टानों मे पुनःक्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया से निर्मित होती हैं। पट्टिताश्मीय, ग्रेनाइट, सायनाइट, स्लेट, शिस्ट, संगमरमर, क्वार्टजाइट आदि कायांतरित या रूपांतरित चट्टानों के कुछ उदाहरण हैं। इसलिए कथन 3 सही नहीं है।
Question 9
ये क्षेत्र शीत शीतोष्ण पश्चिमी सीमांत क्षेत्र वर्ष पर्यन्त पछुवा पवनों के स्थायी प्रभाव में रहते हैं. ये अत्यधिक चक्रवाती गतिविधियों के क्षेत्र भी हैं. ग्रीष्मकाल कभी भी बहुत उष्ण नहीं होता है. इस जलवायु प्रकार की प्राकृतिक वनस्पति में ओक, एल्म, ऐश, बर्च, बीच, चिनार और हॉर्नबीम जैसे पर्णपाती वृक्ष सम्मिलित हैं. उपर्युक्त परिच्छेद में निम्नलिखित जलवायु प्रकारों में से किसका वर्णन किया गया है?
A
भूमध्यसागरीय जलवायु
B
ब्रिटिश तुल्य जलवायु
C
स्टेपी जलवायु
D
नटाल तुल्य जलवायु
Question 10
लक्षद्वीप द्वीपसमूह के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
A
सम्पूर्ण द्वीप समूह प्रवाल निक्षेपों से निर्मित है.
B
नॉरकोंडम लक्षद्वीप समूह में एक लघु ज्वालामुखी द्वीप है.
C
लक्षद्वीप द्वीपसमूह की सर्वाधिक ऊंची चोटी सैडल पीक है.
D
ग्यारह डिग्री चैनल लक्षद्वीप को मालदीव से अलग करता है.
Question 10 Explanation: 
अरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय सम्मिलित हैं। संपूर्ण द्वीप समूह को मोटे तौर पर ग्यारह डिग्री चैनल (अक्षांश) द्वारा विभाजित किया गया है, जिसके उत्तर में अमिनी द्वीप तथा दक्षिण में कनानोर द्वीप स्थित है। ये द्वीप 8°N-12° और 71°E -74°E देशांतर के मध्य फैले हुए हैं। ये द्वीप केरल तट से 280 किमी से 480 किमी की दूरी पर स्थित हैं। संपूर्ण द्वीप समूह प्रवाल निक्षेपों से निर्मित है। इस द्वीपसमूह पर तूफान निर्मित पुलिन हैं, जिन पर अबद्ध गुटिकाएं (pebbles), रोड़े (shingles), गोलाश्मिकाएं (cobbles) तथा पूर्वी समुद्र तट पर गोलाश्म (boulders) पाए जाते हैं। मालदीव और भारत (लक्षद्वीप) के मध्य समुद्री सीमा का निर्धारण आठ-डिग्री चैनल के माध्यम से होता है, जिसे स्थानीय रूप से 'आदिगिरी कांडू' के नाम से जाना जाता है। सैडल पीक या सैडल पहाड़ी भारत के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में उत्तरी अंडमान द्वीप पर स्थित है। नॉरकोंडम अंडमान सागर में स्थित एक लघु ज्वालामुखीय द्वीप है। इसे प्रसुप्त ज्वालामुखी माना जाता है। इसलिए विकल्प (a) सही उत्तर है।
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