मैंग्रोव और मैंग्रोव एलायंस फॉर क्लाइमेट (MAC)

Sansar LochanBiodiversity1 Comment

27वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP27) में इंडोनेशिया एवं UAE द्वारा मैंग्रोव एलायंस फॉर क्लाइमेट (Mangrove Alliance For Climate – MAC) लॉन्च किया गया।

मैंग्रोव एलायंस फॉर क्लाइमेट (MAC) के बारे में

यह एक अंतर-सरकारी गठबंधन है जो मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण और बहाली की दिशा में प्रगति का विस्तार और तेजी लाने का प्रयास करता है। यह गठबंधन प्रकृति आधारित जलवायु परिवर्तन समाधान के रूप में मैंग्रोव की भूमिका के बारे में वैश्विक जागरूकता बढ़ाएगा। यह वैश्विक स्तर पर मैंग्रोव वनों के पनर्वास को सनिश्चित करेगा। इसके सदस्य मैंग्रोव वनों को लगाने और बहाल करने, बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने और ज्ञान साझा करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता निर्धारित कर सकते हैं।

यह गठबंधन, सदस्य देशों द्वारा मैंग्रोव अनुसंधान, प्रबंधन और तटीय क्षेत्रों के संरक्षण और जलवायु शमन और अनुकूलन पर ध्यान केंद्रित करते हुए सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्रों में कार्यान्वित परियोजनाओं का समर्थन करेगा। यह नवाचार और अनुसंधान के साथ-साथ वैज्ञानिक और सामाजिक-आर्थिक अध्ययनों को बढ़ावा देकर मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र की जलवायु परिवर्तन शमन क्षमताओं को भी बढ़ाएगा।

मैंग्रोव क्या होता है?

मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र स्थलीय वनों और जलीय समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों के मध्य एक कड़ी के रूप में कार्य करता है. यह लवण-सहिष्णु वनस्पति है, जो नदियों और ज्वारनदमुखों के अंतर्ज्वारिय क्षेत्रों में उत्पन्न होती है.

मैंग्रोव से प्राप्त होने वाले लाभ

तटीय संरक्षण (Coastal protection): मैंग्रोव वन तटों को मजबूत आधार प्रदान करते हैं तथा तूफान, समुद्री जल धाराओं, तरंगों और ज्वार से होने वाले क्षरण को भी कम करने में सहायता करते हैं.

जलवायु विनियमन (Climate regulation): मैंग्रोव वनों में वस्तुतः स्थलीय वनों (terrestrial forests) की तुलना में चार गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने की क्षमता मौजूद है.

जल निस्यंदन (Water filtration): 2-5 हेक्टेयर मैंग्रोव की सहायता से 4 हेक्टेयर जलीय कृषि (aquaculture) के अपशिष्ट जल का निस्तारण किया जा सकता है.

मत्स्यन (Fisheries): मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र में 3000 से अधिक मछलियों की प्रजातियां पाई जाती हैं.

मैंग्रोव संरक्षण के उपाय

  • सुंदरबन के कुछ हिस्सों को कानूनी तौर पर राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों (विशेष रूप से बाघ संरक्षण) के रूप में संरक्षित किया गया है.
  • वैज्ञानिकों ने नीदरलैंड की तर्ज़ पर समुद्रतटीय मृदा के कटाव को रोकने हेतु डाइकों (Dikes) के निर्माण का सुझाव दिया है.
  • सुंदरबन को रामसर कन्वेंशन के अंतर्गत शामिल किया जाना एक सकारात्मक कदम है. यह कन्वेंशन नमभूमि (Wetlands) और उनके संसाधनों के संरक्षण तथा बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिये राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का ढाँचा उपलब्ध कराता है.
  • सुभेद्यता के अनुसार सुंदरबन को विभिन्न उपक्षेत्रों में विभाजित कर प्रत्येक के लिये एक निर्देशित समाधान कार्यक्रम अपनाया जाना चाहिये.
  • इस क्षेत्र में नदियों के अलवणीय जल की मात्रा में वृद्धि के उपाय किये जाने चाहिये.

मानवीय कारणों से होने वाले निम्नीकरण को रोकने के लिये-

  • स्थानीय समुदायों को जागरूक करना एवं उनकी समस्याओं के लिये वैकल्पिक समाधानों को लागू करना.
  • सामान्य पर्यटन की जगह जैव-पर्यटन (Eco-Tourism) को बढ़ावा देना.
  • वनोन्मूलन (Deforestration) पर रोक एवं वनीकरण को बढ़ावा देना.
  • संकटग्रस्त जीवों एवं वनस्पतियों की सुरक्षा को बढ़ावा देना.
  • जैव-तकनीक के माध्यम से मैंग्रोव का संरक्षण एवं पुनर्स्थापन.

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