मैग्नेटोस्फीयर क्या है और इसकी उत्पत्ति कैसे होती है?

Sansar Lochanविश्व का भूगोलLeave a Comment

पृथ्वी के चुम्बकीय मंडल मैग्नेटोस्फीयर (Magnetosphere) अर्थात् पृथ्वी से सटे प्लाज्मा पर्यावरण में स्थित विद्युत् क्षेत्र के ढाँचों के अध्ययन के लिए भारतीय भूचुम्बकत्व संस्थान (Indian Institute of Geomagnetism – IIG) के वैज्ञानिकों ने एक एक-आयामी (one-dimensional) द्रव अनुकरण संहिता (fluid simulation code) तैयार की है. यह संहिता भविष्य में अन्तरिक्ष अभियानों की योजना में लाभकारी होगी.

magnetospheer

मैग्नेटोस्फीयर क्या है?

  1. मैग्नेटोस्फीयर पृथ्वी के चारों फैला वह क्षेत्र है जिसमें पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का विशेष प्रभाव रहता है.
  2. सौरमंडल के अन्य ग्रहों में भी इस प्रकार के चुम्बकीय मंडल होते हैं, किन्तु चट्टान से बने सभी ग्रहों में पृथ्वी का चुम्बकीय मंडल (मैग्नेटोस्फीयर) सबसे प्रबल होता है.

महत्त्व

मैग्नेटोस्फीयर सौर एवं ब्रह्मांडीय कण विकिरण से हमारी रक्षा करता है. साथ ही यह सौर पवनों से वायुमंडल में होने वाले अपक्षय से भी हमें बचाता है.

मैग्नेटोस्फीयर की उत्पत्ति कैसे होती है?

  • पृथ्वी के बाहरी भाग में स्थित सतह के बहुत नीचे पाए जाने वाले आवेशित एवं पिघले हुए लोहे के संवहन से मैग्नेटोस्फीयर की उत्पत्ति होती है.
  • सूर्य से लगातार आने वाले सौर पवन हमारे चुम्बकीय क्षेत्र के सूर्योन्मुखी भाग पर दबाव डालते हैं.
  • चुम्बकीय क्षेत्र का यह सूर्योन्मुखी भाग पृथ्वी की त्रिज्या से छह से लेकर दस गुनी दूरी तक फैला हुआ है.
  • मैग्नेटोस्फीयर का वह भाग जो सूर्यविमुख होता है वह एक विशाल चुम्बकीय पुच्छ (Magnetotail) की तरह दूर तक फैला हुआ होता है. इसकी लम्बाई एक जैसी नहीं रहती है और यह पृथ्वी की त्रिज्या के सैंकड़ों गुना तक आगे जाता है और यहाँ तक कि चंद्रमा के परिक्रमा कक्ष से भी बहुत दूर निकल जाता है.

मैग्नेटोस्फीयर का अध्ययन आवश्यक क्यों?

  • हमारे अन्तरिक्षीय परिवेश को समझने के लिए पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर को समझना आवश्यक होता है. इसके अध्ययन से हम लोग पूरे ब्रह्मांड में अन्तरिक्ष की जो प्रकृति होती है उसको बेहतर ढंग से जान पायेंगे.
  • इससे हमें अन्तरिक्षीय मौसम को भी समझने में सहायता मिलेगी. विदित हो कि हमारे ढेर सारे अन्तरिक्षयान चुम्बकीय क्षेत्र में विचरण करते हैं. मैग्नेटोस्फीयर (magnetosphere) की गतिविधियों से इन अन्तरिक्षयानों और संचार प्रणालियों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है. मैग्नेटोस्फीयर की सम्यक जानकारी से इन दुष्प्रभावों से बचने के उपाय ढूँढने में सहायता मिलेगी.
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