INS विक्रांत के बारे में संक्षिप्त जानकारी

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स्वदेशी विमानवाहक पोत “INS विक्रांत”

स्वदेशी विमानवाहक पोत “विक्रांत’ को 2 सितंबर, 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में कमीशन किया गया। INS विक्रांत पर विमान लैंडिंग परीक्षण नवंबर में शुरू होगा और वर्ष 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा। यह कैरियर वर्ष 2023 के अंत तक पूर्ण रूप से चालू हो जाएगा।

UPSC Syllabus : यह टॉपिक GS Paper 3 के “आंतरिक सुरक्षा” के अंतर्गत आएगा. 

INS Vikrant Details

INS विक्रांत के विषय में मुख्य तथ्य

  • विक्रांत युद्धपोत की लम्बाई लगभग 262 मीटर, चौड़ाई 62 मीटर और इसकी ऊंचाई 59 मीटर है।
  • इसे स्वदेशी विमान वाहक वन (IAC-1) के रूप में भी जाना जाता है।
  • इसका निर्माण वर्ष 2009 में शुरू हुआ था। इसकी कुल स्वदेशी सामग्री 76% है।
  • विक्रांत का निर्माण भारतीय नौसेना के लिए कोचीन शिपयार्ड, केरल द्वारा किया गया है। 
  • लागत: 20,000 करोड़ रुपये
  • INS विक्रांत में 2,200 से अधिक कोच हैं, जिन्हें लगभग 1600 लोगों के दल के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें महिला अधिकारियों को समायोजित करने के लिए विशेष केबिन भी शामिल हैं। 
  • क्रूज़िंग स्पीड: 18 knots (समुद्री मील), अधिकतम गति: 28 knots
  • आईएनएस विक्रांत 4 जनरल इलेक्ट्रिक गैस टर्बाइन द्वारा संचालित है। यह Short Take Off But Arrested Recovery Mechanism (STOBAR) पर काम करता है.
  • आईएनएस विक्रांत का आदर्श वाक्य (motto line) “जयमा सम युधि स्पर्धा:” (Jayema Sam Yudhi Spradhah) है। यह ऋग्वेद से लिया गया है। इसका अर्थ है “मैं उनको हराता हूं जो मेरे खिलाफ लड़ते हैं”
  • “विक्रांत’ के निर्माण के साथ, भारत अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन और फ्रांस जैसे देशों के चुनिंदा समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास स्वदेशी रूप से विमान वाहक डिजाइन और निर्माण करने की अद्वितीय क्षमता है।

FAQ about INS Vikrant

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