[Sansar Editorial] जलाशय (Reservoir) और उनमें जल भंडार की वर्तमान स्थिति

Sansar LochanSansar Editorial 2019Leave a Comment

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Water in major reservoirs of 10 states below 2017 levels: CWC

The Hindu –  January 03

27 दिसम्बर, 2018 को CWC द्वारा जारी एक आँकड़े के अनुसार दस भारतीय राज्यों के जलाशयों में जल का स्तर पिछले दस वर्षों के औसत जल-स्तर से 22% नीचे रहा.

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जलाशय किसे कहते हैं?

प्रायः बड़ी प्राकृतिक या कृत्रिम झील को, या पोखर को, या किसी बांध के निर्माण के फलस्वरूप निर्मित जलभंडार को जलाशय कहते हैं. परन्तु हम यहाँ जिस जलाशय की चर्चा करने वाले हैं वह जलाशय नदियों पर बाँधों के निर्माण के कारण बन जाने वाला जलभंडार है, जिसे अंग्रेजी में  reservoir कहते हैं.

जल भंडार की वर्तमान स्थिति

  • वर्ष 2017 की तुलना में, 2018 में दस भारतीय राज्यों के जलाशयों में जल-स्तर में कमी देखी गई. ये राज्य हैं – झारखण्ड, ओडिशा, प.बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना एवं कर्नाटक.
  • CWC द्वारा 27 दिसम्बर, 2018 को निर्गत आँकड़ों के अनुसार, इन 10 राज्यों के जलाशयों का स्तर पिछले 10 वर्षों के औसत संग्रहण से कम है.
  • दक्षिण भारत के चार राज्यों में जलाशयों का स्तर बहुत कम रहा. वहाँ वर्ष 2018 में जल-भंडारण पिछले दशक के औसत जल-भंडारण से 46% कम था. इन राज्यों में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जलाशयों में औसत-संग्रहण सबसे कम था.
  • पश्चिमी राज्यों में जलाशयों में 29% कम जल-संग्रहण के साथ गुजरात जल की कमी के मामले में प्रथम स्थान पर रहा. उसके बाद महाराष्ट्र का स्थान है (27% कम).
  • पूर्व और पूर्वोत्तर राज्यों (त्रिपुरा को छोड़कर) प.बंगाल, झारखंड और ओडिशा के जलाशयों में संग्रहीत जल पिछले दस वर्षों के औसत भंडारण से कम था.
  • प.बंगाल ने सबसे कम जल-संग्रहण किया (24% कम) और उसके बाद झारखंड (14% कम) और ओडिशा (4% कम) का स्थान रहा.

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रबी फसल उगाने वाले किसान किस प्रकार प्रभावित हो सकते हैं?

यदि जलाशयों में पानी कम हो तो रबी फसल पर उसका बुरा प्रभाव पड़ता है. महाराष्ट्र के पुणे और नासिक जैसे कुछ क्षेत्रों में कम बारिश ने रबी की फसल को बहुत हद तक प्रभावित किया और यदि जलाशयों में जल का कम भंडारण हो तो यह स्थिति और भी विकट हो सकती है. जलाशयों की कम संग्रहण क्षमता यह भी दर्शाती है कि जिन नदियों से इनमें पानी आता है, उन नदियों में गाद ज्यादा जमा हो गई है. कर्नाटक राज्य के नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार गाद के कारण तुंगभद्रा बांध की जल संधारण की क्षमता भी काफी कम हो गई है.

इन जलाशयों से कृषि, पशुधन और बिजली उत्पादन के लिए प्रयोग किये जाने वाले जल की आपूर्ति की जाती है. जल की माँग और आपूर्ति कभी अधिक तो कभी कम होती है. जब बरसात कम होती तो इनसे अधिक पानी की निकासी की जाती है.

भारतीय मौसम विभाग ने यह भविष्यवाणी की है कि अल नीनो 2019 मानसून को प्रभावित करेगा. मानसून के कमजोर रहने पर जलाशयों में पानी कम जमा होगा और परिणामस्वरूप भारत में पहले से ही तनावग्रस्त किसानों का तनाव और भी बढ़ जाएगा. मार्च 2018 में, नितिन गडकरी ने देश में बन चुके बांधों की कुल क्षमता को 253 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) से बढ़ाकर 450 बीसीएम करने का आह्वान किया. परन्तु अब समय आ गया है कि देश में मौजूद जलाशयों के इष्टतम उपयोग के सन्दर्भ में यथार्थ स्थिति की पड़ताल की जाए.

जल प्रवाह को प्रभावित करने वाले कारक

  • बारिश की कमी
  • सिंचाई की अधिकांश ज़रूरत भूजल से पूरी होती है.
  • मनुष्य एवं जानवरों के अपशिष्ट पदार्थ, प्राकृतिक भूभाग एवं शहरी क्षेत्रों से निर्गत औद्योगिक कचरे जल प्रवाह को बाधित करते हैं.
  • पानी की चोरी
  • अत्यधिक गर्मी से जल का वाष्पीकरण
  • पहाड़ों में बर्फ का कम पड़ना (इस कारण नदियों में पानी का बहाव कम हो जाता है)

CWC क्या है?

  • केन्द्रीय जल आयोग जल संसाधन से सम्बंधित एक मूर्धन्य तकनीकी निकाय है जो जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्रालय के तहत आता है.
  • CWC का अध्यक्ष चेयरमैन कहलाता है जो भारत सरकार के पदेन सचिव के स्तर का होता है.
  • आयोग का कार्य सम्बंधित राज्य सरकारों के साथ विमर्श कर देश-भर में जल संसाधनों के नियंत्रण, संरक्षण एवं उपयोग के लिए आवश्यक योजनाओं को आरम्भ करना, उनका समन्वयन करना और उन्हें आगे बढ़ाना है जिससे कि बाढ़ का नियंत्रण हो तथा सिंचाई, नौकायन, पेयजल आपूर्ति तथा जलशक्ति विकास के कार्य सम्पन्न हो सकें.
  • यदि आवश्यक हो तो यह आयोग ऐसी योजनाओं की छानबीन, निर्माण तथा क्रियान्वयन को भी अपने हाथ में लेता है.
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