Exam-stress se khud को किस tareh bachaayen?

Sansar LochanSuccess Mantra20 Comments

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यदि आपको आने वाले इग्जाम (exam) ने स्ट्रेस दे दिया है तो इसे पढ़ लें….

फिर से परीक्षा का बुखार सर पर चढ़ रहा है. IBPS, RRB, IAS MAINS न जाने कितनी परीक्षाओं की तैयारियों में आप लगे होंगे. पता नहीं आपके साथ कभी हुआ या नहीं. “तैयारी” शब्द से मुझे घृणा होने लगी थी. कोई भी पड़ोस से घर में आता और पूछता आपtaarikh_sunnyका बेटा क्या कर रहा है. माँ कहती “तैयारी” कर रहा है. मेरे पिताजी के मित्र अपने बेटे की बड़ी-बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट की खबर उन्हें सुनाते और उनसे पूछ डालते कि आप अपने बेटे की अपडेट नहीं बता रहे….वो क्या कर रहा है? फिर से वह तैयारी शब्द सामने आ जाता. मेरा बेटा “तैयारी” में जुटा है. “तैयारी” शब्द मेरे लिए सनी देओल द्वारा ऊँचे स्वर में बोले गए “तारीख पे तारीख” जैसी इरिटेटिंग हो गया था. अरे भाई, कौन-सी “तैयारी”, कैसी “तैयारी”….मैं खुद से पूछता. आखिर कब इन परीक्षाओं से पाला छूटेगा. होगा भी या नहीं? आखिरी अटेम्प्ट है. इन्हीं घबराहटों के साथ फिर से वही “तैयारी” में जुट जाता जो रुकने का नाम नहीं ले रही थी. कांपते हाथों से DI (data interpretation) और Maths को हल करता रहता. कॉपी पर लिखा हर अंक जैसे मानों मुझे कह रहा हो कि बेटा तू किस दिशा में जा रहा है? क्या यही तेरा भविष्य है? तू मुझे हल (solve) कर के क्या ख़ाक उखाड़ लेगा? इंग्लिश (English) भी तेरा इंतज़ार कर रही है. इंग्लिश पार कर लेगा तो जटिल GK और करंट देने वाला करंट अफेयर्स तेरा बेड़ा गर्क कर देगा और इन सब के बावजूद तू अगर इंटरव्यू (interview) तक पहुँच गया, तो वहाँ बैठे दानव तेरी पढ़ाई की कुंडली को खंगाल कर तुझे कंगाल कर देंगे.

खैर, मेरे साथ क्या हुआ, यह तो मैं आपको नहीं बताऊंगा. मगर जो भी हुआ, अच्छा हुआ और अच्छा इसीलिए हुआ क्योंकि मैंने सही समय पर सही निर्णय लिया. मैं भागा नहीं, अथक प्रयास किया और आज मैं अपने पैरों पर खड़ा हूँ, खाने को खा रहा हूँ, पीने को पी रहा हूँ (जल मात्र) और रहने के लिए सर पर छत है. एक चीज में कामयाबी नहीं मिली, तो उसके लिए रोने-धोने के बजाय दूसरी चीज में हाथ लगा देना चाहिए. संतुष्टि बड़ी चीज होती है. यदि आप करोड़ पाकर भी संतुष्ट नहीं हैं तो आपका जीवन निरर्थक है. हाँ, रोटी, कपड़ा और मकान जैसे बुनियादी जरूरतों से आगे भी यदि आपको कुछ आवश्यक महसूस होता हो तो आप उसके लिए प्रयास जरुर कीजिये. मगर मेरी सलाह है कि अपनी आवश्यकताओं को इतना भी नहीं बढ़ाइए कि कालांतर में आपको खुद परेशानी होने लगे.

अब काम की बात….

पहली बात तो ये कि यदि इस अप्रोच के साथ तैयारी में जुटे हो या आपके मन में ऐसा कुछ है कि अपने किसी दूर के परिवार के सदस्य या अपने पड़ोसी को सिर्फ दिखाने के लिए कि “हाँ मैं एक आईएएस (IAS)या बैंक पीओ (bank po) बन सकता हूँ” —- तो आप गलत रास्ते पर जा रहे हो. दूसरों की नज़र में खुद को प्रूव करना कोई बहादुरी नहीं, मूर्खता है. जिसके लिए आप प्रूव करने की सोच रहे हो, वो खुद नहीं चाहते कि आपकी नौकरी लगे या आपका कुछ अच्छा हो. उसके लिए प्रयास करना खुद को तंग करना है और समय की बरबादी है. तैयारी खुद को प्रूव करने के लिए जरुर कीजिये मगर इसे अपने भर तक सीमित रखिये. परीक्षा की तैयारी खूब जोर-शोर से कीजिये. आपको १०% भी लगे कि आप इस परीक्षा को निकाल सकते हैं तो अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं आने दें.

१० घंटे पढ़ने से अच्छा है कि आप तीन से चार घंटा ही पढ़िए. मगर याद रखें, यह ३-४ घंटा सिर्फ आपका होना चाहिए. फुल फोकस होकर पढ़े और अपनी कमियों पर ध्यान दें.  यदि आपका मैथ्स कमजोर (weak maths) है, तो उसे एवरेज लेवल (average level) तक लाइये और जिस विषय पर आपकी पकड़ ज्यादा है उसे और भी तगड़ा बनाइये ताकि ओवर ऑल मार्क्स अच्छा आये और सेक्शनल कट ऑफ (sectional cut-off) के जंजाल से आपको मुक्ति मिले. अपने कमजोर पक्ष को हमेशा औसत बनाने की कोशिश करें.

बहुत लोग आपको यह सलाह देते होंगे कि आपका मैथ्स खराब है तो खूब मैथ्स पढ़ो. दिन-रात एक कर दो, सुधरेगा क्यों नहीं? पर मेरा मानना है, कि जो सब्जेक्ट कमजोर है उसे औसत बनाने का कोशिश कीजिये, वही आपके लिए पर्याप्त है. बाकी विषयों पर अधिक ध्यान दे कर उन्हें मजबूत करें. बेस्ट रिजल्ट (best result) अगर जल्दी नहीं आया, तो हताश न हों. धैर्य रखें. लगे रहें, जुटे रहें उस काम में.

सभी के जीवन में डिस्टर्बेंस (disturbance) है. आपको दोस्तों से वाट्सएप (whatsapp)पर चिट-चैट करना है. शादी के मौसम में शादी भी अटेंड करनी है, आप भी पढ़ते-पढ़ते थकोगे और फिर हार मान लोगे, मन बदलेगा, खुद से कहोगे, नहीं अब और नहीं, अब नहीं पढ़ सकता, फिर से पढने बैठोगे…..भारत पाकिस्तान का मैच देखोगे, ज्यादा ही मैच में रूचि है तो टेस्ट मैच भी देख डालोगे, फेसबुक में लाल-लाल नोटिफिकेशन देखने में जो आनंद आता है वह इस बोरिंग किताब के काले-काले अक्षरों में कहाँ! क्यों? इसीलिए इन सब डिस्टर्बेंस को मन में बाँध के चलिए, चाहे दुनिया ही क्यूँ नहीं पलट जाए, आप इनसे दूर नहीं भाग सकते.

कुछ लोग शिकायत बहुत करते हैं. मेरा मैथ्स अच्छा नहीं, मेरी इंग्लिश तो एक दम रद्दी है. पता नहीं कैसे होगा. इस बार तो उम्मीद कम ही है. मगर एक होशियार इंसान इन बातों से दूरी बनाए रखता है और प्रयास में लगा रहता है जब तक रिजल्ट पॉजिटिव (positive result) न हो जाए.

कोचिंग (coaching) और सेल्फ स्टडी (self-study)दोनों का अपना-अपना महत्त्व है. कोचिंग में परीक्षा के पैटर्न का पता चलता है और पढ़ाई में एक नियमितता आती है. आप रोज कोचिंग जाते हो, अपने जैसे परीक्षार्थियों से मिलते हो, कुछ सीखने को मिलता है. वहीँ सेल्फ-स्टडी से अपनी कमजोरियों का पता चलता है. जब सवाल नहीं बनते तो आप उनसे जूझते हो, खुद को धिक्कारते हो, गलतियों को ढूँढ़ते हो. कहाँ कमी रह गयी, यह जाने का प्रयास करते हो जो कोचिंग में रहकर संभव नहीं.

[Tweet “You’re the best judge of your own caliber.”]

लगे रहिये …जब तक कुछ हासिल न हो जाए. परीक्षा है ….सैकड़ों सर आपके साथ परीक्षा में बैठे हैं….सैकड़ों सर में कोई साक्षात् रामानुज है, कोई आईन्सटाइन और कोई इंग्लैंड की धरती से उतरा लार्ड मैकाले जिसके लिए इंग्लिश टेढ़ी खीर नहीं, रसगुल्ला है. वो सारे सवालों को गड़प कर जायेगा, आप बैठे रह जाओगे. इसीलिए उठो वत्स! जागो….आप यहाँ कॉन्सोलेशन प्राइज के लिए नहीं आये, आपको फर्स्ट होना है उस भीड़ में जो अक्सर परीक्षा केंद्र में मंडराती नजर आती है, हाथों में एडमिट कार्ड लिए….

अगले लेख में आपके लिए कुछ और नया लेकर आऊंगा.

Title of the article: Exam-stress se khud को किस tareh bachaayen? 

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20 Comments on “Exam-stress se khud को किस tareh bachaayen?”

  1. hello sir .I am new.my name is tara haldar. maine graduation complete kiya h. or me ek hindi medium school se pdi hu. Sir mere ghar se meri shadi krwana chahta h.lekin me kuch krna chahti hu bnana chahti hu. Isle liye maine p.c.s. k liye socha h . or me ek art ki student hu. me bhut kmjor hu. plz ap mujhe btao ki kya krna h.kaise tayari kre iski.kitna time de. or maine aaj hi apka airtical pda h bhut achha lga.

  2. सर,
    मेरी बेसिक गणित बहुत ही कमजोर है। मैं ग्रामीण क्षेत्र से सम्बन्ध रखता हूँ और मेरी अकादमिक शिक्षा ग्रामीण क्षेत्र के उस राजकीय विद्यालय में हुई जहाँ गणित,विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों के योग्य शिक्षकों की हमेशा कमी रही और परिणाम यह रहा कि हम इन विषयों में कमजोर रह गए। हालाँकि कक्षा 10 में अंग्रेजी कमजोर होने की वजह से अंग्रेजी में पूरक परीक्षा देनी पड़ी थी, जहाँ 10th मुख्य परीक्षा में मेरे 80 में से सिर्फ 9 अंक आये थे और ओवर आल 100 में से 26 अंक आये थे वही मात्र 25 दिन की ट्यूशन लेकर पूरक परीक्षा में यह आंकड़ा मैंने 78 तक पहुंचा दिया था।फ़िलहाल मैं आर्ट्स स्ट्रीम से ग्रेजुएट हूँ मगर यह गणित हमेशा से मेरे सामने एक विकट मुद्दा रहा है।
    मैं अपनी गणित किस प्रकार से सुधार सकता हूँ?
    कृपया श्रीमान जी मदद कीजिये!

    1. महेंद्र जी, आपने इतना लम्बा चौड़ा कमेंट लिखा तो इसका जवाब देना मेरे लिए अनिवार्य हो गया था. जहाँ तक मेरे टीचिंग अनुभव का प्रश्न है मुझसे कई छात्रों ने गणित को लेकर यही सवाल पूछा है और मेरा उत्तर हर बार एक ही रहता है. मैं गणित का शिक्षक नहीं हूँ फिर भी यदि मैं वैज्ञानिक तरीके से सोचूं तो मुझे लगता है कि मैथ्स अच्छा होना और अच्छा नहीं होना….यह हमारे ब्रेन का पार्ट है. हमारे मस्तिष्क का आधा भाग जिसमें गणित अच्छा हो या नहीं, यह निर्धारित करता है. सुनकर आपको अजीब लग रहा होगा पर मैंने कई अध्ययनों के बाद यह पाया कि गणित का अच्छा या न होना यह हमारे किस्मत में पहले से लिखा होता है. आपने गौर किया होगा कि कोई मवाली या सड़क छाप इंसान भी चुटकियों में जोड़ घटाव और गुणा कर देता है. वे इंसान जिन्होंने कभी किताबों का मुँह तक नहीं देखा हो.

      पर हर कुछ किस्मत में छोड़ देना अच्छा नहीं होता. कई लोग जन्मजात शरीर से लाचार पैदा होते हैं पर वे मेहनत करके वैसे कारनामे कर डालते हैं जो स्वस्थ इंसान भी नहीं कर सकता. इसलिए मैथ्स को अच्छा करना भी हमारे हाथ में है. पर यह याद रखें कि मैथ्स के लिए आपको हो सकता दूसरे लोगों की तुलना में कई गुणा अधिक मेहनत करना पड़े.

      जहाँ तक रहा परीक्षा का प्रश्न तो हर परीक्षा में मैथ्स का लेवल अलग-अलग होता है. जैसे यदि बैंकिंग, SSC आदि परीक्षा की बात कर लें तो मैथ्स का लेवल काफी टफ होता है. बैंकिंग परीक्षा में भी यदि SBI परीक्षा की बात कर लें तो उसमें मैथ्स से पूछे गये सवाल अन्य बैंकों की तुलना में काफी टफ होता है.

      इसलिए भला इसी में है कि इन परीक्षाओं की तैयारी में आप अपनी एनर्जी और टाइम मत गवाएँ. हाँ यदि आपके पास पर्याप्त समय है, जैसे 2-3 साल …तो आप इन परीक्षाओं की भी तैयारी कर सकते हैं. पर मेरी सलाह यही है कि आप सिविल सर्विसेज या लेक्चररशिप इत्यादि की तैयारी करें जहाँ मैथ्स सरल है और इसकी तैयारी चंद किताबों और प्रैक्टिस से की जा सकती है.

      आपका कमेंट — कमेंट ऑफ़ द वीक में डाल रहा हूँ जहाँ किताबों के बारे में भी आपको बताऊँगा.

  3. Hello sir, me is blog k new reader hu, bhut hi inspire krne wala or scha article hai, aaj kl mere sath b TYARI TYARI chl rhi hai.. Pr koi ni jo krna hai Bo krna hai chahe koi kush b bole soche smje, hme to test clear krna hai, sir me ECONOMICS student hu NET JRF ki tyari kr rhi hu last time ten marks se rh gya…karn mera confidence level jo gr me rh rh akele study krte krte gir rha hai.. Tyari me b koi kmi rhi hogi, Pr tyari Jari hai..
    Wese last attempt ni hai mera bhut chance hote hai Pr muje bs is bar July me krna hai clear. Aap muje please kush tips ya tricks bta skte hai. Me old player hu 😛

    1. आपका कमेंट चार महीने बाद जा कर पढ़ा, जिसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ. यदि फिर से कोई आपका सवाल हो तो बेहिचक पूछें और अपना अपडेट भी बताएँ कि इस बार का प्रदर्शन आपका कैसा रहा?

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  7. great sir,but you stopped at your story,it was so inspirning for me,because it is same as my life,please sir tell us ki apke sath kya hua tha,apne phir konsa rasta select kiya,

  8. Sir,
    Aap k blog ka har lecture motivated hota h…thanx sir for providing study materials for Hindi language students.
    Sir, mujhe aap k dwara likhiit English easy book download krni h plz sir uska price kitna h aur kaise download kre k bare me tjodi jankari dene k kripa kare..
    Thanx….

  9. thank you sir.
    mujje aj hi ye page dekhne ko mila..
    parso IBPS PO ka ppr hai.
    ek bar to himmat haari huyi si lg rhi thi.
    par apka article dekhne k bad fr se.
    josh aa gya hai.
    ki abki fod k ana hai.

    again
    thank you sir

  10. Sir,ek dum sahi course khatam hote hi puchte hain,placement hui kya, job ka kya chal raha hain …….. Khud job karte nahi dusro se puchte hain … .Aur Jab job lag gayi to ye hi log jalenge aur kahenge job kya mil gayi ab to milta hi nahi hain.. …

  11. ektarafa sirji……… ektarfa …outstanding……one of the most real article i have read…..finest …just keep up the good work …you must not stop

    1. धन्यवाद कुमार जी ! अपने हिंदी-प्रेमी मित्रों को अवश्य यहाँ आमंत्रित करें.

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