[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Eco-Bio-Tech GS Paper 3/Part 8

Sansar LochanEconomics Notes, Fiscal Policy and Taxation, GS Paper 3, Sansar Manthan3 Comments

सामान्य अध्ययन पेपर – 3

वित्तीय समावेशन क्या है? इसके उद्देश्य और महत्त्व की विस्तार से चर्चा करें. (250 words)

  • अपने उत्तर में अंडर-लाइन करना है  = Green
  • आपके उत्तर को दूसरों से अलग और यूनिक बनाएगा = Yellow

यह सवाल क्यों?

यह सवाल UPSC GS Paper 3 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप में लिया गया है –

समावेशी विकास और इससे उत्पन्न विषय.

सवाल का मूलतत्त्व

वित्तीय समावेशन को परिभाषित करने की कोशिश करें. उद्देश्य और महत्त्व शब्दों से तात्पर्य कभी-कभी एक जैसा लगता है मगर इन दोनों के बीच बारीक अंतर है. उद्देश्य में आपको बताना है कि वित्तीय समावेशन की मूल आत्मा क्या है. जबकि महत्त्व में आपको यह बताना चाहिए कि वित्तीय समावेशन किस-किस क्षेत्र में अपना महत्त्व रखता है.

उत्तर :-

वित्तीय समावेशन को कमजोर वर्गों और कम आय वाले समूहों की वित्तीय सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है (जैसे – बचत खाता, कम लागत वाले ऋण, वित्तीय सलाहकार और बीमा सुविधाएँ).

वित्तीय समावेशन के उद्देश्य

  1. विभिन्न वित्तीय सेवाओं, जैसे – बचत बैंक खाते, ऋण, बीमा, भुगतान और प्रेषण एवं वित्तीय तथा क्रेडिट सलाहकार आदि तक पहुँच प्रदान करना.
  2. अनौपचारिक ऋण बाजार के शोषण से अपवर्जितों की रक्षा करना ताकि उन्हें मुख्यधारा में लाया जा सके.

वित्तीय समावेशन का महत्त्व

GDP :- वित्तीय समावेशन और गरीबी के साथ इसका सीधा सह-सम्बन्ध है. विभिन्न अध्ययनों ने यह सिद्ध किया है कि बैंकिंग प्रणाली से अपवर्जन के परिणामस्वरूप देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 1% की हानि हुई है.

औपचारीकरण :- यह लघु व्यवसायों या सूक्ष्म उद्यमों के लिए ऋण उपलब्धता की औपचारिक प्रणाली सृजित करता है. इसके फलस्वरूप इन उद्यमों और व्यवसायों के स्वामियों को निवेश करने और व्यवसाय को बढ़ाने में सहायता मिलेगी.

बीमा तक पहुँच में सुधार :- रुग्णता, प्राकृतिक आपदा, फसल हानि या रोजगार की कमी जैसे आपात स्थितियों में गैर-नियोजित व्यय से सुरक्षा प्राप्त होगी.

बैंकों को लाभ :- वित्तीय समावेशन ग्रामीण जनसंख्या के एक बड़े हिस्से में बचत की संस्कृति पैदा करता है और आर्थिक विकास की प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण :- वित्तीय समावेशन लाभार्थी के खाते में प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण को सक्षम बनाता है जिससे कि लागत को कम करना, वितरण नेटवर्क में रिसाव को कम करना, किसी अन्य के नाम पर लाभ देने वाले लाभार्थी की पहचान करना, इच्छित लाभार्थी तक पहुँचना और सेवाओं का समय पर वितरण करना सुगम हो जाता है.

साहूकारी व्यवस्था का उन्मूलन :- यह औपचारिक ऋण तक आसान पहुँच की सुविधा के माध्यम से सूद पर धन देने वाले साहूकारों द्वारा कमजोर वर्गों के शोषण को कम करता है.

अवैध धन पर नियंत्रण :-  इसका लक्ष्य समाज में सर्वाधिक गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को गरीबी से बाहर निकलने में सक्षम बनाते हुए तथा समाज में असमानता को कम करते हुए समावेशी विकास करना है.

सामान्य अध्ययन पेपर – 3

वित्तीय समावेशन के समक्ष माँग-पक्ष और आपूर्ति-पक्ष सम्बन्धी बाधाओं के विषय में आप क्या जानते हैं?  (250 words)

  • अपने उत्तर में अंडर-लाइन करना है  = Green
  • आपके उत्तर को दूसरों से अलग और यूनिक बनाएगा = Yellow

यह सवाल क्यों?

यह सवाल UPSC GS Paper 3 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप में लिया गया है –

समावेशी विकास और इससे उत्पन्न विषय…

सवाल का मूलतत्त्व

माँग पक्ष और आपूर्ति पक्ष शब्द प्रश्न में बहुत ही भ्रामक है. यदि कोई इस चीज को नहीं समझ पायेगा तो उत्तर देना मुश्किल हो सकता है.

उत्तर :-

वित्तीय समावेशन के माँग-पक्ष संबंधी बाधाओं से तात्पर्य वित्तीय सेवाओं की माँग में कमी है. वित्तीय सेवाओं की माँग में कमी निम्नलिखित कारणों से हो सकती है –

  1. जागरूकता में कमी, गरीबी और निरक्षरता उन कारकों में से हैं जिनके परिणामस्वरूप वित्तीय सेवाओं की माँग में कमी आती है और इस प्रकार वित्तीय अपवर्जन होता है.
  2. ग्राहकों के लिए बैंकों का प्रतिकूल और असंवेदनशील रवैया भी वित्तीय सेवाओं की माँग को कम करने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

वित्तीय समावेशन के आपूर्ति-पक्ष से सम्बंधित समस्याएँ निम्नलिखित कारणों से हो सकती हैं –

  1. बैंक शाखाएँ पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी अधिक कमी है. इसके अतिरिक्त बहुधा वित्तीय उत्पादों को महिलाओं की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए संरचित, वितरित या समूहीकृत नहीं किया जा सकता.
  2. वित्तीय समावेशन को मुख्य आधार प्रदान करने वाली आधारभूत अवसंरचनाएँ जैसे – पर्याप्त गति वाला इन्टरनेट, उपकरण (कंप्यूटर या स्मार्ट फोन) बिजली इत्यादि पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं.
  3. संचार का अभाव, भाषा सम्बन्धी बाधाएँ और साक्षरता का निम्न स्तर जैसे कारक भी बैंकरों को उपयुक्त पहल करने से रोकते हैं.

Reminder : Last date of SMA Assignment is 22.09.2018 (Latest Assignment SMA 02 Part 1)

“संसार मंथन” कॉलम का ध्येय है आपको सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में सवालों के उत्तर किस प्रकार लिखे जाएँ, उससे अवगत कराना. इस कॉलम के सारे आर्टिकल को इस पेज में संकलित किया जा रहा है >> Sansar Manthan

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