[संसार मंथन 2020] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Modern History Gs Paper 1/Part 06

Sansar LochanGS Paper 1 2020-21Leave a Comment

दांडी की यात्रा (Dandi March) के विषय में संक्षिप्त विवरण लिखें.

उत्तर :-

गाँधीजी ने असहयोग आंदोलन का प्रारंभ दांडी नामक गाँव में समुद्र के जल से नमक बनाकर करने का निश्चय किया. 12 मार्च, 1930 को वह अपने 79 सहयोगियों के साथ साबरमती आश्रम से 200 मील की दूरी पर समुद्रतट पर बसे गाँव दांडी के लिए निकल पड़े. उनके इस निर्णय की सूचना पाकर अनेक उत्साही व्यक्ति, कार्यकर्त्ता, किसान, मजदूर उनके साथ हो लिए. सुभाषचंद्र बोस ने दांडी यात्रा की तुलना नेपोलियन के ‘पेरिस मार्च और मुसोलिनी के ‘रोम मार्च’ से की है.

पटेल की गिरफ्तारी ने गुजगत की जनता को और भी उत्तेजित कर रखा था; परंतु गाँधी ने उन्हें शांत और अहिंसक बनाए रखा. 5 अप्रैल, 1930 को गाँधी ने दांडी पहुँचकर समुद्र के पानी से नमक बनाया और शांतिपूर्ण अहिंसक ढंग से सरकारी कानून का उल्लंघन किया. गाँधीजी द्वारा कानून भंग किए जाने की घटना का आम जनता पर व्यापक तौर से प्रभाव पड़ा. पूरे देश में बिजली-सी दौड़ गई. जो जहाँ था, वहीं सरकार से असहयोग करने लगा. हजारों विद्यार्थियों ने स्कूल, कॉलेज छोड़ दिए, अनेकों ने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया, किसानों ने लगान देना बंद कर दिया, मजदूरों ने हड़तालें रखीं और प्रदर्शन किए. सारे देश में तूफान-सा आ गया. सभी लोग अंग्रेजी राज्य के खात्मे के लिए कमर कसकर तैयार हो गए. विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई, सरकारी दुकानों पर धरना दिए गए.

आरंभ में सरकार ने आंदोलन को गंभीरतापूर्वक नहीं लिया एवं इसकी उपेक्षा की, परंतु शीघ्र ही स्थिति की भीषणता का उसे आभास हुआ. अतः, उसने नृशंसतापूर्वक इस आंदोलन को दबाने का प्रयास किया. सत्याग्रहियों को पकड़-पकड़कर जेलों में भरा जाने लगा. अनेक व्यक्तियों को सेना और पुलिस की गोली का शिकार बनना पड़ा. काँग्रेस को गैर-कानूनी संस्था घोषित कर दिया गया. 15 मई, 1930 को स्वयं गाँधीजी गिरफ्तार हुए. अन्य नेता भी गिरफ्तार किए गए.

गाँधीजी की गिरफ्तारी से आंदोलन दबने की अपेक्षा और अधिक भड़क उठा. चटगाँव पर सूर्यसेन एवं उनके साथियों ने अधिकार कर लिया. पश्चिमोत्तर सीमाप्रांत में गढ़वाली सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया. शोलापुर में भी विद्रोह की अग्नि भभक उठी. नागालैंड की अल्पवयस्का रानी गैडिनल्यू (गुइंदालों) ने विद्रोह का झंडा उठाया. ‘सीमांत गाँधी’ ने पठानों के बीच “खुदाई खिदमतगारों’ और “लाल कुर्ती’ वालों द्वारा सरकार को अत्यधिक परेशानी में डाल दिया. अब सरकार भी गाँधी और काँग्रेस के महत्त्व को समझने पर बाध्य हो गई. वह समझ गई कि आंदोलन को सिर्फ ताकत के बल पर ही नहीं दबाया जा सकता. अतः संवैधानिक सुधारों की भी बात सोची जाने लगी. इसी उद्देश्य से लंदन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन हुआ, लेकिन काँग्रेस के बहिष्कार के चलते वह असफल रहा. बाध्य होकर सरकार को गाँधी के साथ साथ समझौता-वार्ता करनी पड़ी, जो “गाँधी-इरविन पैक्ट” के नाम से विख्यात है .

Tags : The Dandi March, Salt March in Hindi

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मेरा नाम डॉ. सजीव लोचन है. मैंने सिविल सेवा परीक्षा, 1976 में सफलता हासिल की थी. 2011 में झारखंड राज्य से मैं सेवा-निवृत्त हुआ. फिर मुझे इस ब्लॉग से जुड़ने का सौभाग्य मिला. चूँकि मेरा विषय इतिहास रहा है और इसी विषय से मैंने Ph.D. भी की है तो आप लोगों को इतिहास के शोर्ट नोट्स जो सिविल सेवा में काम आ सकें, मैं उपलब्ध करवाता हूँ. मैं भली-भाँति परिचित हूँ कि इतिहास को लेकर छात्रों की कमजोर कड़ी क्या होती है.
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