स्वतंत्रता संग्राम के दौरान समाचार पत्र तथा पत्रिकाएँ व उनके संस्थापक

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आज हम आपको भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान (freedom struggle era) समाचार पत्र तथा पत्रिकाएँ (newspapers and magazines) व उनके संस्थापक/सम्पादक (writers/founders/editors) के नाम बताने वाले हैं. इस list को हमारे experts के द्वारा तैयार किया गया है, अगर फिर भी कोई mistake है तो कृपया कमेंट में लिखें. Writers/Founders of Newspapers and Magazines During Freedom Struggle in Indian History … Read More

अरबिंदो घोष का जीवन परिचय और राजनीतिक विचार

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आज इस पोस्ट में हम अरबिंदो घोष के जीवन परिचय, राजनीतिक विचार और उनकी कुछ रचनाओं के विषय में चर्चा करेंगे. जीवन परिचय अरबिंदो घोष का जन्म 15 अगस्त 1872 को कलकत्ता में हुआ. वे लगभग 13 वर्ष इंग्लैंड में रहे और वहीँ ICS बनने की तैयारी की और ICS लिखित परीक्षा पास की किन्तु घुड़सवारी में असफल होने के कारण … Read More

मार्शल लॉ – अंग्रेजों की क्रूरता की हद!

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जालियाँवाला बाग़ के हत्याकांड ने पंजाब सरकार की उग्रता को शांत न करके और अधिक प्रज्वलित कर दिया. 13 अप्रैल के हत्याकांड ने न केवल अमृतसर में बल्कि पंजाब के अन्य नगरों में भी भयानक आतंक फैला दिया था. फिर भी पंजाब  लैफ्टिनेंट गवर्नर ने आवश्यक समझा कि अमृतसर में और अन्य कुछ स्थानों पर मार्शल लॉ अथवा सैनिक कानून लगा दिया जाए. … Read More

1857 से पूर्व के महत्त्वपूर्ण विद्रोह

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आपने 1857 के विद्रोह के विषय में लिखे हुए हमारे पोस्ट को पढ़ा ही होगा. आज हम 1857 ई. से पूर्व हुए महत्त्वपूर्ण विद्रोहों की चर्चा करेंगे – संन्यासी विद्रोह 1770 इस संन्यासी विद्रोह का उल्लेख बंकिम चन्द्र चटर्जी ने अपने उपन्यास “आनंदमठ” में किया है. तीर्थ स्थानों पर लगे प्रतिबंधों से संन्यासी लोग बहुत क्षुब्ध हुए. संन्यासियों के बीच अन्याय के … Read More

गुरु नानक देव की संक्षिप्त जीवनी और शिक्षाएँ

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गुरु नानक का प्रारंभिक जीवन सिख धर्म के प्रणेता गुरुनानक देव रावी के तट पर स्थित तलवंडी (आधुनिक ननकाना साहिब, पाकिस्तान) में नवम्बर 1469 ई. में एक खत्री परिवार में उत्पन्न हुए थे. उनके पिता का नाम मेहता कालू चंद था. उनका विवाह 18 वर्ष की आयु में ही हो गया था और उन्हें पिता के व्यवसाय से सम्बंधित लेखा-जोखा … Read More

प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746-48 ई.) : कारण एवं परिणाम

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प्रथम कर्नाटक युद्ध : भूमिका मुगलों के पतन के बाद राजनैतिक प्रभुत्व के लिए देशी शासकों के साथ-साथ विदेशी ताकतें भी संघर्षरत हो गयीं. देशी ताकतों में मुख्य रूप से मराठे थे तो विदेशी ताकतों में असली लड़ाई अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच थी. इन दोनों शक्तियों में प्रभुत्व का यह संघर्ष 60-70 साल चला और नेपोलियन के पतन के … Read More

शिवाजी की विजयें और प्रमुख सफलताएँ – List of Conquests

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शिवाजी ने 1645-47 ई. के मध्य जिन तीन किलों पर अधिकार किया वे पहाड़ी दुर्ग थे. कुछ समय बाद (1656 ई. में) उन्होंने जावली (Jawali) पर विजय की. यह विजय शिवाजी के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण विजय थी. इस विजय के बाद – अब उनके लिए अपने राज्य को दक्षिण-पश्चिम में फैलाना आसान हो गया. यहाँ से प्राप्त सैनिक (मालवी सैनिक) … Read More

पूना सार्वजनिक सभा 1870 ई. के विषय में विस्तृत जानकारी

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पूना सार्वजनिक सभा (मराठी – पुणे सार्वजनिक सभा) की स्थापना 2 अप्रैल, 1870 ई. को महादेव गोविंद रानडे ने की थी. पूना सार्वजनिक सभा सरकार और जनता के बीच मध्यस्थता कायम करने के लिए बनाई गई थी. भवनराव श्रीनिवास राव इस संस्था के प्रथम अध्यक्ष थे. बाल गंगाधर तिलक, गोपाल हरि देशमुख, महर्षि अण्णासाहेब पटवर्धन जैसे कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने इस संगठन के … Read More

बटलर समिति के बारे में जानें – Butler Committee 1927 in Hindi

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प्रथम विश्वयुद्ध के समय में देशी शासकों ने ब्रिटिश सरकार की बहुमूल्य सहायता की थी. युद्ध के अंत होने पर भारत में उत्तरदायी शासन के विकास की योजना बनाई गई. फलतः देशी शासकों और ब्रिटिश सरकार के बीच के सम्बन्ध की व्याख्या करने और ब्रिटिश सार्वभौम सत्ता को पारिभाषित करने की जरूरत महसूस हुई. फलतः 1927 ई. में इसकी जाँच … Read More

ल्हासा की संधि – Treaty of Lhasa 1904 ई. in Hindi

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आज हम ल्हासा की संधि (Treaty of Lhasa) के बारे में जानेंगे. यह कब हुआ, किनके बीच और किन परिस्थतियों (causes) में हुआ, इन सब के विषय में चर्चा करेंगे. भूमिका लॉर्ड कर्जन की तिब्बत सम्बन्धी नीति उसके वायसराय काल की एक महत्त्वपूर्ण घटना है. गवर्नर जनरल लॉर्ड वारेन हेस्टिंग्स के समय में ब्रिटिश सरकार तिब्बत के साथ व्यापारिक सम्बन्ध … Read More