भारत में वामपंथी विचारधारा का उद्भव और आन्दोलन

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बीसवीं सदी के दूसरे दशक के बाद भारत में एक शक्तिशाली वामपक्ष का उदय हुआ. मार्क्सवाद और दूसरे समाजवादी विचार बहुत तेजी से फैले. राजनीतिक दृष्टि से इस शक्ति की अभिव्यक्ति कांग्रेस के अंदर एक वामपंथ के उदय के रूप में हुई, जिसने राष्ट्रीय मुक्ति संघर्ष की धारा को दलितों – शोषितों की सामाजिक आर्थिक मुक्ति की धारा के नजदीक … Read More

भारत में क्रांतिकारी आन्दोलन – Revolutionary Movements

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20वीं शताब्दी के पूर्वाह्न में भारत में उग्रवाद के साथ-साथ उग्र क्रांतिवाद का भी विकास हुआ. क्रांतिकारी आन्दोलन के उत्थान के मुख्यतः वही कारण थे, जिनसे राष्ट्रीय आन्दोलन में उग्रवाद का उदय हुआ. उग्र राष्ट्रवादियों का ही एक दल क्रांतिकारी के रूप में उभरा. भेद केवल यह था कि उग्र क्रान्तिकारी अधिक शीघ्र परिणाम चाहते थे. यद्यपि भारत के भिन्न-भिन्न … Read More

भारत सरकार अधिनियम – Government of India Act, 1935

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ब्रिटिश शासन के द्वारा भारतीय जनता को संतुष्ट करने के लिए सन् 1861, 1892, 1909, 1919 और 1935 में कानून पास किये गए लेकिन ये सुधार भारतीय जनता को कभी संतुष्ट नहीं कर सके. 1935 का भारतीय सरकार/शासन अधिनियम (Government of India Act, 1935) भारतीय संविधान का एक प्रमुख स्रोत रहा है. भारत के वर्तमान संविधान की विषय-सामग्री और भाषा … Read More

द्वैध शासन से आप क्या समझते हैं? Diarchy in Hindi

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Subhas_Chandra_Bose

1919 ई. के भारत सरकार अधिनियम द्वारा प्रांतीय सरकार को मजबूत बनाया गया और द्वैध शासन (diarchy) की स्थापना की गई. 1919 के पहले प्रांतीय सरकारों पर केंद्र सरकार का पूर्ण नियंत्रण रहता था. लेकिन अब इस स्थिति में परिवर्तन लाकर प्रांतीय सरकारों को उत्तरदायी बनाने का प्रयास किया गया. इस द्वैध शासन का एकमात्र उद्देश्य था – भारतीयों को पूर्ण … Read More

भारत सरकार अधिनियम, 1919 – मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार

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1858 में कम्पनी की सत्ता हस्तगत करने के पश्चात् ब्रिटिश सरकार ने भारत में सहयोग की नीति का अनुसरण किया. इसे कार्य रूप देने के लिए 1861, 1892 एवं 1909 के अधिनियम पारित किये गये. परन्तु यह नीति सफल सिद्ध नहीं हुई. इसलिए ब्रिटिश सरकार ने अपनी भारतीय नीति में बदलाव लाया. यह अनुभव किया गया कि केवल भारतीयों से … Read More

[कालक्रम] Modern History Important Topics

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अभी तक हमने #Adhunik India By Sajiva Sir Notes में पढ़ा –  Chronology of History of Modern India प्रथम विश्व युद्ध के प्रारंभ में भारतीय राष्ट्रीय नेताओं ने ब्रिटेन के युद्ध प्रस्तावों का स्वागत किया था. प्रथम विश्व युद्ध ने यूरोपियनों की जातीय श्रेष्ठता की भावना को समाप्त कर दिया. तिलक ने अप्रैल 1916 में बम्बई के बेलगांव में अपने होमरूल … Read More

तृतीय गोलमेज सम्मेलन – Third Round Table Conference

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1932 में पुनः एक गोलमेज सम्मेलन लंदन में हुआ. तृतीय गोलमेज सम्मेलन (Third Round Table Conference) का आयोजन 17 नवम्बर 1932 से 24 दिसम्बर 1932 तक किया गया. इस सम्मेलन में केवल 46 प्रतिनिधियों ने भाग लिया. तृतीय गोलमेज सम्मेलन में मुख्यतः प्रतिक्रियावादी तत्वों ने ही भाग लिया. भारत की कांग्रेस तथा ब्रिटेन की लेबर पार्टी ने इस सम्मेलन में … Read More

साम्प्रदायिक पंचाट – Communal Award in Hindi

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16 अगस्त, 1932 की ब्रिटिश प्रधानमंत्री रेम्जे मेकडोनाल्ड ने “साम्प्रदायिक पंचाट” या “साम्प्रदायिक निर्णय” (Communal Award or Macdonald Award) की घोषणा की. यह अंग्रेजों द्वारा भारत में अपनाई गई “फूट डालो और राज करो” की नीति का एक अन्य उदाहरण था. साम्प्रदायिक पंचाट भारतीय राष्ट्रवाद के विकास को दबाने के लिए अंग्रेजों ने बल प्रयोग के अतिरिक्त छल-प्रपंच एवं कूटनीति … Read More

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन – Second Round Table Conference

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सरकार ने कांग्रेस को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (Second Round Table Conference) में सम्मिलित होने के लिए मनाने के प्रयास प्रारम्भ कर दिए. इसके तहत वाइसरॉय से वार्ता का प्रस्ताव दिया गया. इसके तहत वाइसरॉय से चर्चा के लिए आधिकारिक रूप से नियुक्त किया. गाँधी जी और वाइसरॉय इरविन की बातचीत 19 फरवरी, 1931 से शुरू हुई. 15 दिन की बातचीत … Read More

प्रथम गोलमेज सम्मेलन (12 नवम्बर, 1930 – 19 जनवरी, 1931)

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जिस दौरान पूरे भारत में सविनय अवज्ञा आन्दोलन प्रगति पर था और सरकार का दमन चक्र तेजी से चल रहा था, उसी समय वायसराय लॉर्ड इर्विन और मि. साइमन ने सरकार पर यह दबाव डाला कि वह भारतीय नेताओं तथा विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों से सलाह लेकर भारत की संवैधानिक समस्याओं का निर्णय करे. इसी उद्देश्य से लन्दन में तीन … Read More