शेल और शेल गैस का निर्माण : Shale Gas and its Formation

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल5 Comments

शेल और शेल गैस क्या हैं? शेल बारीक कण वाली तलछटी चट्टाने हैं जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के समृद्ध स्रोत होती हैं. शेल गैस वह प्राकृतिक गैस (natural gas) है जो शेल चट्टानों के बीच फंसी होती है. सामान्य प्राकृतिक गैस और शेल गैस के निर्माण में अंतर पृथ्वी के अन्दर जमा सामान्य प्राकृतिक गैस (conventional natural gas) धीरे-धीरे … Read More

महासागर के भौगोलिक प्रदेश – Continental Shelves, Slopes and Deep Sea

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल5 Comments

महासागर को तीन भगौलिक प्रदेशों में बाँटा जा सकता है – 1. महादेशीय निधायों का प्रदेश (Continental Shelves) 2. महादेशीय ढलानों (Continental Slope/slopes) का प्रदेश, और 3. अथाह समुद्री तल (Deep Sea Floor) प्रदेश. चलिए जानते हैं इन सभी के बारे में in Hindi. महादेशीय निधाय (Continental Shelf) Continental Shelf यद्यपि समुद्र से सम्बन्ध रखता है पर यह अन्य दो … Read More

अटलांटिक महासागर की जलधाराएँ – Currents of the Atlantic Ocean

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोलLeave a Comment

आज हम अटलांटिक महासागर की जलधाराओं (Currents of the Atlantic Ocean) के बारे में जानेंगे. इसके कितने प्रकार (types) हैं औरये कब-कहाँ बहती हैं और इनके नाम कब और कैसे बदल जाते हैं, ये सब की चर्चा करेंगे. नोट: यदि आप इस पोस्ट को बिना Map reading के पढ़ने वाले हैं तो आपके दिमाग में कुछ नहीं आने वाला है. … Read More

ज्वालामुखी क्या है और इसके प्रकार : All info about Volcano

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल21 Comments

आज हम इस पोस्ट के माध्यम से ज्वालामुखी क्या है, यह कैसे उत्पन्न होता है और इसके कितने प्रकार हैं आदि का अध्ययन करेंगे. क्यों न इस पोस्ट की शुरुआत हम ज्वालामुखी के इतिहास से करें जिससे हमें इसके बारे में समझने में आसानी भी हो और पढ़ने में दिलचस्प भी हो. ज्वालामुखी का इतिहास एक हजार वर्ष से ऊपर … Read More

वायुभार – Information about Pressure of the Air

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल1 Comment

पृथ्वी की आकर्षण-शक्ति (gravitational power) के चलते प्रत्येक वस्तु में अपना एक विशेष भार होता है. ऐसी वस्तुओं में भी, जो देखी नहीं जा सकतीं, भार (दबाव) मिलता है. वायु एक ऐसी ही वस्तु है. पृथ्वी को घेरती हुई सैंकड़ों मील की मोटी परत में यह विस्तृत है. इसकी सबसे अधिक घनी तह (fold) पृथ्वी के नजदीक मिलती है. जैसे-जैसे … Read More

वर्षा के Types, Reasons, Measurement और Distribution

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल1 Comment

वर्षा (Rain) के लिए दो बातों का होना अत्यंत आवश्यक है – वायु में पर्याप्त जलवाष्प का होना और ऐसे साधन का होना जिससे वाष्पयुक्त वायु ठंडी होकर घनीभूत (condensate) हो सके. आज हम वर्षा के विषय विस्तृत जानकारी (information) आपको देने वाले हैं. आज हम इस लेख में पढेंगे कि वर्षा कैसे होती है, इसके कितने प्रकार (types) हैं, … Read More

चक्रवात के विषय में विस्तृत जानकारी : Cyclone Info in Hindi

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल35 Comments

cyclone_hindi_चक्रवात

परिभाषा: चक्रवात निम्न वायुदाब के केंद्र होते हैं, जिनके चारों तरफ केन्द्र की ओर जाने वाली समवायुदाब रेखाएँ विस्तृत होती हैं. केंद्र से बाहर की ओर वायुदाब बढ़ता जाता है. फलतः परिधि से केंद्र की ओर हवाएँ चलने लगती है. चक्रवात (Cyclone) में हवाओं की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सुई के विपरीत तथा दक्षिण गोलार्द्ध में अनुकूल होती … Read More

तापान्तर – Meaning of Range of Temperature in Geography

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल1 Comment

तापान्तर से मतलब किसी स्थान के उच्चतम तापक्रम (temperature) और निम्नतम तापक्रम के अंतर से होता है. आइये जानते हैं इस word के बारे में जो अक्सर भूगोल की किताबों में देखा जाता है. तापान्तर तापान्तर दैनिक हो सकता है और वार्षिक भी. पृथ्वी के अधिकतर स्थानों में जनवरी और जुलाई के तापमानों में ही सबसे अधिक अंतर मिलता है. … Read More

तापमान को प्रभावित करने वाले कारक – Factors affecting Temperature

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल7 Comments

आज हम तापमान (temperature) को प्रभावित करने वाले कारकों (factors) की चर्चा करेंगे. किसी क्षेत्र का तापमान क्यों अधिक और क्यों कम होता है, इस बात को हम इस आर्टिकल के द्वारा समझने की कोशिश करेंगे. यदि किसी क्षेत्र का तापमान अधिक है तो इसका साफ़ मतलब होता है कि वहाँ बहने वाली वायु गर्म है. इसलिए क्यों न हम … Read More

जेट स्ट्रीम क्या है? भारतीय मानसून इससे कैसे प्रभावित होता है?

Sansar LochanGeography, विश्व का भूगोल2 Comments

जेट स्ट्रीम या जेटधाराएँ ऊपरी वायुमंडल में और विशेषकर समतापमंडल में तेज़ गति से प्रवाहित/बहने वाली हवाएँ हैं. इनके प्रवाह की दिशा जलधाराओं की तरह ही निश्चित होती है, इसलिए इसे जेट स्ट्रीम का नाम दिया गया है. जेट स्ट्रीम धरातल से ऊपर यानी 6 से 14 km की ऊँचाई पर लहरदार रूप में चलने वाली एक वायुधारा है. इस … Read More