[Sansar Editorial] बजट 2021-22: स्टार्ट-अप के लिए प्रावधान

Sansar LochanSansar Editorial 2021Leave a Comment

भारत में उद्यमशीलता तेजी से बढ़ी है. भारत 2020 में शीर्ष 50 नवोन्मेषी अर्थव्यवस्थाओं में एक था.

पहले स्टार्टअप के बारे सुनकर लोग पूछते थे कि आप नौकरी क्यों नहीं कर लेते? लेकिन अब लोग कहते हैं कि नौकरी करने के स्थान पर आप स्टार्टअप क्यों नहीं खड़ा कर लेते? 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के लिए केंद्रीय बजट में राजकोषीय घाटे में वृद्धि और आर्थिक विकास के मध्य संतुलन बनाया है. गत वर्ष महामारी के बाद से कारोबार प्रारम्भ होने से स्टार्ट-अपों को बहुत प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिला था, परन्तु इस बजट में आत्मनिर्भरता के लिए नींव रखने की संभावना होगी जिससे भविष्य में उनके विकास में सहायता मिलेगी.

budget 2021-2022 start up

Image Source: News18

स्टार्टअप क्या हैं ?

स्टार्टअप इंडिया योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं का लाभ वही स्टार्टअप उठा सकते हैं जिनका पंजीकरण पाँच वर्ष से पहले नहीं हुआ हो, जो भारत में ही पंजीकृत हैं और जिनका पिछले वित्तीय वर्ष का वार्षिक कारोबार 25 करोड़ से अधिक न हो, और जो नई तकनीक के विकास और अनुसन्धान की दिशा में कार्य कर रहे हों.

स्टार्ट-अप से सम्बंधित बजट 2021-2022 में मुख्य बिंदु

बजट 2021-22 में भारत में स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन देने के लिए अनेक कदम उठाने का जिक्र किया गया है :-

  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 के बजट में स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन देने के लिए महत्त्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं.
  • इन कदमों से देश में स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा.

वन पर्सन कंपनियों (ओपीसी) के लिए प्रावधान

  • वन पर्सन कंपनियों (One Person Companies -OPCs) अर्थात् एक व्यक्ति वाली कंपनी को प्रोत्साहित करने के लिए बजट 2021-22 में अनेक कदम उठाए गए हैं. इससे देश में स्टार्टअपों और इनोवेटर्स को प्रत्यक्ष रूप से लाभ प्राप्त होगा.
  • ओपीसी कंपनियों को प्रोत्साहन देने हेतु कंपनी (निगमन) नियम [Companies (Incorporation) Rules] में संशोधन किया जा रहा है. इसके अंतर्गत ओपीसी के लिए चुकता पूँजी और टर्नओवर की बाध्यता हटा दी गई है.
  • भारत में निवासी माने जाने वाले अनिवासी भारतीयों हेतु निवास की अनिवार्यता को भी 182 दिनों से घटाकर 120 दिन कर दिया गया है. इससे विदेश में रहने वाले कई भारतीयों को भारत में कारोबार स्थापित करने में सहायता मिलेगी.
  • इसके अतिरिक्त, अनिवासी भारतीयों (NRI) को भी भारत में OPC खोलने की अनुमति दी गई है. विदित हो कि आज तक NRI को ओपीसी खोलने की अनुमति नहीं थी. अब कोई भी व्यक्ति, जो एक भारतीय नागरिक है, चाहे वह भारत में निवासी हो या अनिवासी हो उसे ओपीसी बनाने की अनुमति होगी. ओपीसी के संबंध में नए संशोधन 1 अप्रैल, 2021 से प्रभावी होंगे.
  • ओपीसी कंपनियों को किसी भी समय दूसरी प्रकार की कंपनियों में परिवर्तित करने की भी छूट मिलेगी. ओपीसी कंपनी को सरकारी या निजी कंपनी में बदलने के लिए अभी तक वर्ष काम करने का प्रावधान था जिसे अब समाप्त कर दिया गया है. अब कोई भी ओपीसी कंपनी कभी भी अपने को सरकारी या निजी कंपनी में परिवर्तित कर सकेगी. इस कदम से स्टार्टअप के लिए व्यापार करना सरल हो जाएगा और उनके व्यापार बढ़ाने में पर्याप्त रूप से मदद मिलेगी.
  • इसी प्रकार, चुकता पूँजी (Paid up capital) और टर्नओवर की सीमा को समाप्तकर दिया गया है. आज की तिथि में ओपीसी के लिए 50 लाख रुपये की चुकता पूँजी और दो करोड़ रुपये के औसत वार्षिक टर्नओवर का प्रावधान है.

टैक्स से सम्बंधित छूट

  • आयकर अधिनियम की धारा80-IAC के वर्तमान प्रावधानों के अनुसार कोई भी स्टार्ट-अप अपने काम करने के दस वर्षों में से तीन साल के लिए मुनाफे और लाभ पर आयकर छूट ले सकता है. इसके अंतर्गत स्टार्ट-अप का 1 अप्रैल, 2016 से 1 अप्रैल, 2021 के मध्य गठन होना चाहिए. बजट में इस सुविधा को 31 मार्च, 2022 तक के लिए बढ़ा दिया गया है जिसे बजट में “टैक्स होली डे” का नाम दिया गया है.
  • ठीक इसी प्रकार धारा-54जीबी के अंतर्गत लंबी अवधि वाली संपत्तियों पर मिलने कैपिटल गेन (capital gain) पर कर छूट को 31 मार्च, 2022 तक आगे बढ़ा दिया गया है. अभी यह सुविधा 31 मार्च, 2021 तक ही उपलब्ध थी.

क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम

  • स्टार्ट-अप गेतु क्रेडिट गारंटी फंड योजना (Credit Guarantee Fund for Startups-CGFFS) को बनाने पर भारत सरकार विचार कर रही है.
  • स्टार्ट-अप के लिए क्रेडिट गारंटी निधि का उद्देश्य कर्ज से सम्बंधित आवश्यकताओं के लिए एक तय सीमा तक कर्ज की गारंटी प्रदान करना है.
  • योग्य स्टार्टअपों को क्रेडिट गारंटी देने हेतु मेंबर लेंडिंग इंस्टीट्यूशन (Member Lending Institutions) को भी सम्मिलित कर लिया गया है.
  • स्टार्ट-अप के लिए क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना 2,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ की जाएगी. इसका लाभ डीआईपीपी से मान्यता प्राप्त स्टार्ट-अप ले सकेंगे जिन्हें बैंकों, NBFC, और AIF से 10 करोड़ रुपये तक के कर्ज की गारंटी प्राप्त होगी.
  • क्रेडिट गारंटी फंड योजना का प्रबंधन नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) द्वारा किया जाएगा जो कि क्रेडिट गारंटी फंड के ट्रस्टी के रूप में कार्य करेगा. इसके माध्यम से लगभग 3,000 स्टार्टअपों को 15,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी प्रदान की जाएगी. इसके अंतर्गत औसतन प्रति स्टार्ट-अप को करोड़ रुपये की कर्ज गारंटी दी जायेगी.
  • क्रेडिट गारंटी फंड योजना के अंतर्गत कर्ज पर दी जाने वाली गारंटी से आशा है कि वित्तीय संस्थाएं स्टार्ट-अप को कर्ज देने हेतु उत्साहित होंगी जिससे स्टार्टअप के लिए पूँजी की उपलब्धता में बढ़ोतरी होने की संभावना है.

स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड स्कीम (SISFS)

  • केंद्र सरकार ने स्टार्ट-अप इंडिया सीड फंड योजना (Startup India Seed Fund Scheme – SISFS) को स्वीकृति दी है.
  • इस योजना की अवधारणा यह है कि प्रोटोटाइप विकास (prototype development), उत्पाद परीक्षण (product trials), बाजार में प्रवेश और व्यवसायीकरण के प्रमाण (Proof of Concept) के लिए स्टार्टअप को वित्तीय सहायता दी जाए (प्रत्येक स्टार्ट-अप के लिए 20 लाख). इसके लिए 945 करोड़ की पूँजी सहायता स्टार्ट-अप को प्रदान की जाएगी जो वित्त वर्ष 2021-22 से चार वर्षों के लिए लागू होगी.
  • यह योजना सभी क्षेत्र के स्टार्ट-अप और इनक्यूबेटर हेतु होगी.
  • इस योजना के अंतर्गत चयनित किए गए इनक्यूबेटर को 5 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया जाएगा जिसे तीन या उससे अधिक की किस्तों में दिया जाएगा.

लाभ

  • उपर्युक्त प्रावधान देश में स्टार्ट-अप के विकास में सहायता करेंगे.
  • भारत में विशाल संख्या में महिलाएँ और पुरुष स्टार्ट अप का गठन कर रहे हैं. मेट्रो शहरों के अतिरिक्त, स्टार्ट-अप भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में उभर रहे हैं. उपर्युक्त घोषणाओं से उन्हें अधिक से अधिक लाभ होगा.
  • देश में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा जिससे दीर्घकालिक विकास और समावेशी लक्ष्यों को पूर्ण किया जा सकेगा.
  • डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये का बजट पहल स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के प्रत्येक वर्ग के लिए उत्प्रेरक होने की आशा है.

विश्लेषण

सरकार एक हजार करोड़ रुपये के स्टार्टअप इंडिया सीड फंड का अनावरण कर रही है, ये देश में नए स्टार्टअप को आगे बढ़ने में मदद करेगा. सरकार एक स्टार्टअप सिस्टम बनाना चाह रहे हैं जिसका मंत्र होगा, युवाओं का, युवाओं के द्वारा, युवाओं के लिए”. भारत के 80% ज़िले स्टार्टअप मिशन से जुड़े, सदाबहार खाद्य एवं कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएँ, भारत आज स्टार्ट अप की भावना से काम कर रहा है, भारत हर क्षेत्र में पुरानी बाधाएँ तोड़ रहा है. फिर भी, स्टार्टअप इंडिया ही नहीं बल्कि सभी योजनाओं का समय-समय पर अवलोकन और अवलोकन के जरिये कमियों की पहचान एवं उनमें सुधार किये जाने की जरूरत है.

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