अप्सरा अपग्रेडेड (Apsara-U) – स्वदेश-निर्मित रिएक्टर के बारे में जानें

Richa KishoreScience Tech1 Comment

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एक स्विमिंग पूल के आकार के शोध रिएक्टर “अप्सरा-अपग्रेडेड (Apsara – U)” या “अप्सरा-उन्नत” का भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC), ट्राम्बे में परिचालन आरम्भ हुआ है.

DCA Highlights – Date 12 September, 2018

Link > DCA, 12 Sep, 2018

भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (THE BHABHA Atomic Research Centre) ने लगभग 10 वर्ष पहले बंद कर दिए गये भारत के सबसे पुराने अनुसंधान संयत्र (research reactor) – अप्सरा – को उत्क्रमित कर फिर से चालू कर दिया है. महाराष्ट्र के ट्राम्बे परिसर में स्थित यह संयंत्र Apsara – U के नाम से जाना जाता है.

अप्सरा आणविक संयंत्र क्या है?

  • अप्सरा भारत का सबसे पुराना अनुसंधान संयंत्र है. इसका रूपांकन भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (BARC) ने किया था और इसका निर्माण इंग्लैंड की सहायता से किया गया था (इंग्लैंड ने ही 80% संवर्धित यूरेनियम वाले ईंधन की शुरू में आपूर्ति की थी).
  • अप्सरा संयंत्र सबसे पहले 4 अगस्त, 1956 को चालू हुआ.
  • APSARA एक हल्के जल वाले तरण ताल जैसा संयंत्र (light water swimming pool-type reactor) है जिसका अधिकतम ऊर्जा उत्पादन 1 MWt थर्मल है.
  • यह रिएक्टर में समृद्ध यूरेनियम को जलाता है जो एल्यूमिनियम की मिश्र धातु से बनी मुड़े हुए प्लेटों की आकृति (curved plates) का होता है.
  • अप्सरा संयंत्र का उपयोग कई प्रयोगों के लिए भी होता है, जैसे – न्यूट्रोन एक्टिवेशन विश्लेषण (neutron activation analysis), रेडिएशन क्षति का अध्ययन (radiation damage studies), फोरेंसिक शोध (forensic research), न्यूट्रोन रेडियोग्राफ़ (neutron radiography) तथा शील्डिंग (shielding experiments).
  • इस संयंत्र का प्रयोग रेडियोसोटोपों (radioisotopes) पर शोध तथा उनका उत्पादन के लिए भी किया जाता है.

अप्सरा – उत्क्रमित (Apsara- Upgraded)

  • अप्सरा – उत्क्रमित (Apsara- Upgraded) देश में ही बनाया गया है. इसमें कम संवर्धित यूरेनियम (Low Enriched Uranium – LEU) से बने प्लेट-जैसे विसर्जन ईंधन तत्त्वों (dispersion fuel elements) का प्रयोग होता है.
  • उच्चतर न्यूट्रोन प्रवाह के होने के कारण यह संयंत्र चिकित्सकीय प्रयोग के लिए रेडियो-आइसोटोपों के स्वदेशी उत्पादन में 50% तक वृद्धि करने में समर्थ है.
  • अप्सरा – उत्क्रमित के निर्माण ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि हमारे भारतीय वैज्ञानिक और इंजिनियर में वह क्षमता है कि वे स्वास्थ्य की देखभाल, वैज्ञानिक शिक्षा तथा अनुसंधान के लिए जटिल निर्माण करने में समर्थ हैं.

शोध रिएक्टर क्या होते हैं?

  • शोध रिएक्टर उन न्यूक्लियर रिएक्टर को कहते हैं जिनका प्रयोग अनुसंधान, रेडियो आइसोटोप उत्पादन, शिक्षा, प्रशिक्षण इत्यादि उद्देश्यों के लिए किया जाता है.
  • यदि पॉवर रिएक्टरों से इनकी तुलना की जाए तो शोध रिएक्टर का प्रयोग करना अधिक सरल होता है और ये कम तापमान में भी कार्य करने में सक्षम होते हैं.
  • हाँ यह जरुर है कि पॉवर रिएक्टरों की तरह शोध रिएक्टरों में भी कोर के शीतलन की आवश्यकता होती है.
  • इनमें न्यूट्रॉन की गति को धीमा करने के लिए मंदक (moderator) का उपयोग किया जाता है.
  • इनका मुख्य कार्य न्यूट्रॉन का उत्पादन करना है. ये उद्योग, चिकित्सा, कृषि, फोरेंसिक आदि में उपयोग में लाये जाते हैं. इसलिए अधिकांश शोध रिएक्टरों को कोर से न्यूट्रॉन की क्षति को कम करने के लिए रिफ्लेक्टर की भी आवश्यकता होती है.
  • शोध रिएक्टर देश के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य आधारस्तम्भ है.
  • वर्तमान में भारत में प्रचालित शोध रिएक्टर हैं – अप्सरा – u, ध्रुव और कामिनी.

अप्सरा-U के बारे में जानें

अप्सरा अपग्रेडेड (Apsara – U) स्वदेश निर्मित रिएक्टर है. यह एशिया के पहले शोध रिएक्टर “अप्सरा” का अपग्रेडेड वर्जन है. इसकी शुरुआत 1956 में हुई थी और फिर 2009 में इसे बंद कर दिया गया था. इसमें निम्न परिष्कृत यूरेनियम (low-enriched uranium – LEU) से निर्मित प्लेट के आकार के प्रकीर्णन ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है. उच्च न्यूट्रॉन प्रवाह के कारण यह रिएक्टर स्वास्थ्य अनुप्रयोग में रेडियो-आइसोटोप के स्वदेशी उत्पादन को 50% तक बढ़ा देगा. इसका उपयोग नाभकीय भौतिकी, पदार्थ विज्ञान और रेडियोधर्मी आवरण (radiation shielding) के क्षेत्र में अनुसन्धान के लिए भी किया जाएगा.

कामिनी (कलप्क्कम मिनी)

  • कामिनी 233U ईंधन के साथ कार्यरत विश्व का एकमात्र रिएक्टर है.
  • यह भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तृतीय चरण के लिए बहुत जरुरी है.

ध्रुव (BARC, ट्रॉम्बे में)

  • यह भारत का सबसे बड़ा शोध रिएक्टर है.
  • यह हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम का प्राथमिक स्रोत है.

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