अंबेडकर सर्किट

Sansar LochanHistory Current AffairsLeave a Comment

हाल ही में केंद्र सरकार ने ‘अंबेडकर सर्किट’ (Ambedkar Circuit) की घोषणा की है, जिसमें डॉ भीमराव अंबेडकर से संबंधित 5 प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया है। 

ये स्थान हैं :

  1. जन्मभूमि– मध्य प्रदेश के महू में अंबेडकर का जन्मस्थान 
  2. शिक्षा भूमि– लंदन में वह स्थान जहाँ वह अपने अध्ययन काल में रहते थे।
  3. दीक्षा भूमि– नागपुर में वह स्थान जहाँ उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया। 
  4. महापरिनिर्वाण भूमि– दिल्ली में उनके निधन का स्थान।
  5. चैत्य भूमि– मुंबई में उनके अंतिम संस्कार का स्थान

ज्ञातव्य है कि संसद के सेंट्रल हॉल में अंबेडकर के चित्र का अनावरण भी किया गया है. साथ ही दीक्षा भूमि को एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया है।

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अंबेडकर सर्किट के उद्देश्य

अंबेडकर सर्किट की घोषणा का उद्देश्य दलित समुदाय के अलावा पर्यटकों को आकर्षित करना है, जो ज़्यादातर इन स्थानों पर तीर्थ यात्रा के लिये आते हैं। सर्किट के निर्माण से सरकार को बुनियादी ढाँचे, सड़क और रेल संपर्क एवं आगंतुक सुविधाओं सहित विषय से संबंधित सभी स्थलों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया जायेगा।

सरकार ने पहली बार 2016 में अंबेडकर सर्किट, या पंचतीर्थ का प्रस्ताव दिया था। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पंचतीर्थ में मध्य प्रदेश के महू में अंबेडकर की जन्मभूमि शामिल होगी; शिक्षा भूमि लंदन में वह स्थान जहाँ वहाँ पढ़ते समय रुके थे; नागपुर में दीक्षा भूमि जहाँ उन्होंने बौद्ध धर्म ग्रहण किया; महापरिनिर्वाण भूमि या दिल्ली में उनके निधन का स्थान; और चैत्य भूमि, मुंबई में उनके दाह संस्कार की जगह।

एक विशेष एसी ट्रेन की सुविधा के साथ सरकार इनमें से चार स्थानों को बेहतर कनेक्टिविटी देकर भारत में अंबेडकर के पदचिन्हों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

अम्बेडकर सर्किट के जरिये पर्यटकों को आकर्षित किया जाएगा जो अधिकांशत: इन स्थानों पर तीर्थ यात्रा के रूप में आते हैं। यात्रा में भोजन, जमीनी परिवहन और साइटों पर प्रवेश करने आदि की सुविधाएँ मिलेंगी।

अम्बेडकर के विषय में महत्त्वपूर्ण तथ्य

  • अम्बेडकर ने 1920 में “मूकनायक” (साप्ताहिक) एवं 1927 में बहिष्कृत भारत (मासिक) पत्र का प्रकाशन किया.
  • अगस्त 1936 में “इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी” की स्थापना की जो दलित वर्ग, मजदूर व किसानों की समस्याओं से सम्बंधित थी.
  • इसी संस्था का नाम 1942 में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति संघ कर दिया गया.
  • अंग्रेजों द्वारा आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलन में अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि के रूप में अम्बेडकर ने भाग लिया.
  • स्वतंत्र भारत के केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अम्बेडकर प्रथम विधि मंत्री नियुक्त किये गये. 5 फरवरी 1951 को संसद में अम्बेडकर ने “हिन्दू कोड बिल” पेश किया जिसके असफल हो जाने पर मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया.
  • 1955 में उन्होंने भारतीय बौद्ध धर्म सभा कि स्थापना की तथा नागपुर में 5 लाख व्यक्तियों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया. इनका प्रसिद्ध कथन था कि “मैं हिन्दू धर्म में पैदा हुआ हूँ लेकिन मैं मरूँगा बौद्ध धर्म में”.
  • 1956 में इनकी मृत्यु हो गयी.

अंबेडकर सर्किट के अतिरिक्त अन्य सर्किटें

सरकार ने 2014-15 में स्वदेश दर्शन योजना के तहत 15 टूरिस्ट सर्किट की पहचान की थी।

रामायण और बौद्ध सर्किट के अलावा, अन्य में तटीय सर्किट, डेजर्ट सर्किट, इको सर्किट, विरासत, उत्तर पूर्व, हिमालय, सूफी, कृष्णा, ग्रामीण, आदिवासी और तीर्थंकर सर्किट शामिल हैं। ट्रेन सुविधा के मामले में, रामायण, बौद्ध और उत्तर-पूर्व सर्किट पहले से ही सक्रिय हैं, जबकि अंबेडकर सर्किट चौथे स्थान पर होगा।

जहाँ तक ​​सर्किट विकास का सवाल है, मार्च 2022 तक इन 15 सर्किटों में 5,445 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 76 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई थी।

सर्किट बनाने से क्या लाभ होता है?

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, विशेष सर्किट के निर्माण से उन्हें बुनियादी ढांचे, सड़क और रेल संपर्क और आगंतुक सुविधाओं सहित विषय से संबंधित सभी साइटों के व्यापक विकास पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति मिलती है।हालांकि, पर्यटक के दृष्टिकोण से, हर कोई एक बार में सम्बंधित सभी जगहों में नहीं जा सकता है. सर्किट बन जाने से एक बार ही उन सारे स्थलों पर जाकर पर्यटन का आनंद लिया जा सकता है. ट्रेन की सुविधा मिल जाने से यात्रा और भी आसान हो जाती है.

पर्यटन मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि चूंकि प्रत्येक सर्किट में एक से अधिक राज्य शामिल होते हैं, वे समय-समय पर एक सर्किट पर विशिष्ट स्थानों पर जाने वाले पर्यटकों की संख्या के आंकड़ों को देखते हैं।

ट्रेन और सर्किट के बीच ताल-मेल कैसे काम करता है?

  1. केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने इन थीम-आधारित पर्यटन सर्किटों को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय के पास 3,000 विशेष रेलवे कोच आरक्षित किए हैं।
  2. इस साल की शुरुआत में, आईआरसीटीसी द्वारा रामायण सर्किट पर एक विशेष 14-कोच वाली ट्रेन चलाई गई थी , जिसमें पर्यटकों के लिए वातानुकूलित तीन-स्तरीय कोच, एक पेंट्री कार, एक रेस्तरां कार और ट्रेन के कर्मचारियों के लिए एक अलग कोच था।
  3. इससे पहले, बौद्ध सर्किट के लिए विशेष ट्रेनें भेजी जाती थीं, जो बुद्ध के जीवन से जुड़े गंतव्यों और पूर्वोत्तर सर्किट को भी कवर करती थीं।
  4. धीरे-धीरे मंत्रालय इन ट्रेनों के लिए नए, पसंदीदा रूट तैयार कर रहा है। 

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