अल्जाइमर रोग एवं डिमेंशिया के बारे में जानकारी

Sansar LochanHealthLeave a Comment

वर्ष 2012 से सितंबर माह को “विश्व अल्जाइमर्स महीना घोषित किया गया है। इस साल 21 सितंबर को “विश्व अल्जाइमर्स दिवस” मनाया गया है, जिसका विषय (theme) है – “Know dementia, Know Alzheimer’s’. इसके साथ ही, जागरूकता बढ़ाने और इस बीमारी से जुड़े भ्रमों को चुनौती देने के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान भी चलाया जा रहा है। आइए जानते हैं अल्जाइमर और डिमेंशिया रोग के बारे में.

अल्जाइमर बीमारी का इतिहास

7वीं शताब्दी ईसा पूर्व में, यूनानी दार्शनिक पाइथागोरस ने “मानव जीवन काल” की बात की थी और मानव जीवन के अंतिम वर्षों को सेनियम (Senium) कहा। उसने इस बात की भी पुष्टि की, कि उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति में गिरावट आती है। लेकिन केवल वर्ष 1901 में जाकर ही याददाश्त संबंधी इस बीमारी के बारे में पता चल सका, जब एक जर्मन प्रनोचिकित्सक अलोइस अल्जाइमर ने 50 वर्षीय जर्मन महिला में पहले मामले की पहचान की और प्रस्तिष्क की इस विशेष स्थिति का नाम उन्ही के नाम पर पड़ गया।

आगे चलकर वर्ष 1984 में, अल्जाइमर्स रोग इंटरनेशनल (Alzheimer Disease International) की स्थापना हुई तथा वर्ष 1994 में उनकी 10वीं वर्षगाँठ पर, उन्होंने 21 सितंबर को पहला “विश्व अल्जाइमर दिवस” मनाने की घोषणा की, एवं बाद में वर्ष 2012 में विश्व अल्जाइमर महीना भी शुरू किया गया।

क्यों महत्त्वपूर्ण?

 इस मानसिक स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि अल्जाइमर रोग 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 6% लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन जैसा कि पिछले अध्ययनों से संकेत मिलता है, वैश्विक स्तर पर 3 में से औसतन 2 लोगों को इसकी बहुत कम या कोई समझ नहीं है। बहुत से लोग इस बीमारी को उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा मानते हैं, जो सच नहीं है।

डिमेंशिया (Dementia) के बारे में

डिमेंशिया एक ऐसा सिंड्रोम है जिसमें याददाश्त, सोच, व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों को करने की क्षमता में गिरावट आती है। हालांकि डिमेंशिया मुख्य रूप से वृद्ध लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन यह उम्र बढ़ने का एक सामान्य हिस्सा नहीं है। दुनिया भर में, लगभग 50 मिलियन लोगों को डिमेंशिया है, और हर साल लगभग 10 मिलियन नए मामले सामने आ रहे हैं।

अल्जाइमर रोग

  • अल्जाइमर रोग सबसे अधिक होने वाला तंत्रिका अपक्षयी (न्यूरोडीजेनेरेटिव) विकार है और विस्मृति (डिमेंशिया) के 70% से भी अधिक मामलों के लिए यही जिम्मेदार होता है अर्थात् अल्ज़ाइमर याददाश्त, सोचने और व्यवहार संबंधी समस्याएँ पैदा करता है.
  • अल्ज़ाइमर रोग से ग्रस्त अधिकांश लोग 65 या इससे अधिक उम्र के होते हैं. अल्ज़ाइमर होने के कारण ये भी हो सकते हैं – धूम्रपान, मोटापा, मधुमेह एवं उच्च कोलेस्ट्रॉल तथा अधेड़ उम्र में उच्च रक्तचाप.
  • यदि आपके माता-पिता या भाई-बहनों को अल्ज़ाइमर होता है तो अन्य व्यक्तियों, जिनके निकटतम रक्त-संबंधियों को अल्ज़ाइमर नहीं है, की तुलना में आपमें यह रोग होने की संभावना अधिक होती है। वैज्ञानिक अभी तक इस बात को पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि परिवारों में अल्ज़ाइमर चलने का क्या कारण है, किंतु आनुवंशिकी, पर्यावरणीय कारक और जीवन शैली की एक भूमिका हो सकती है.
  • हालाँकि अल्ज़ाइमर रोग को बढ़ने से रोकने का कोई उपचार फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं, परंतु ऐसी दवाएँ हैं जिससे डिमेंशिया के लक्षणों में कमी लाई जा सकती है.

अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया का सबसे आम रूप है, जो मस्तिष्क के उन हिस्सों को प्रभावित करता है जो स्मृति, विचार या निर्णय और भाषा या संचार को नियंत्रित करते हैं, इस प्रकार अल्जाइमर रोग किसी व्यक्ति के दैनिक जीवन में गंभीर रूप से हस्तक्षेप करता है। इस रोग के 7 चरण माने जाते हैं, जिनमें पहले चरण में न के बराबर लक्षण दिखाई देते हैं और अंतिम चरण तक आते-आते व्यक्ति लगभग सब कुछ भूल जाता है। हालांकि अल्जाइमर का कारण ज्ञात नहीं है और न ही इसका कोई इलाज है, लेकिन जोखिम को कम करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा इसके प्रभाव को कम करने के लिए रक्तचाप को कम करना, व्यायाम करना और धूम्रपान न करने को प्रभावी माना जाता है। अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति को परिवार के सदस्यों, दोस्तों की ओर से विशेष देखभाल की जरूरत होती है।

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