मौलिक अधिकार: Fundamental Rights in Hindi

भारतीय संविधान के तृतीय भाग में नागरिकों के मौलिक अधिकारों (fundamental rights) की विस्तृत व्याख्या की गयी है. यह अमेरिका के संविधान से ली गयी है. मौलिक अधिकार व्यक्ति के नैतिक, भौतिक और आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यधिक आवश्यक है. जिस प्रकार जीवन जीने के लिए जल आवश्यक है, उसी प्रकार व्यक्तित्व के विकास के लिए मौलिक अधिकार. […]

मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक तत्त्वों में अंतर

मौलिक अधिकारों और नीति-निर्देशक तत्त्वों में अंतर

स्वतंत्रताप्राप्ति के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या थी – संविधान का निर्माण करना. इस उद्देश्य से संविधान सभा का गठन किया गया. संविधान-निर्माताओं ने देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अनेक प्रावधान (provisions) किए. देश अनेक आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थतियों से जूझ रहा था. इन परिस्थितियों पर काबू पाना आवश्यक था. नागरिकों को […]