MSF क्या होता है? Marginal Standing Facility in Hindi

इस आर्टिकल को पढ़ने से पहले आशा है कि आपने रेपो रेट, एस.एल.आर. आदि के बारे में पढ़ लिया होगा, यदि नहीं पढ़ा है तो यहाँ क्लिक करें>> Repo rate, SLR, Reverse repo rate, CRR. आज हम MSF की बात करेंगे जिसका फुल फॉर्म है – Marginal Standing Facility. MSF भी बैंकिंग से सम्बंधित टर्म है. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति (2011-12) में सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) शुरू की थी. इसके अंतर्गत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (Scheduled Commercial Bank) रिजर्व बैंक से, वर्तमान रेपो दर से 1% अधिक ब्याज दर पर पैसा उधार ले सकता है. यद्यपि उधार लेने की technique रेपो रेट के जैसी ही है….जैसे>> SBI ने यह कह कर RBI के पास बांड  गिरवी रखी कि वह उसे बाद में अधिक दर पर खरीदकर वापस ले लेगा. इसमें भी बांड गिरवी रखकर लोन लिया जाता है.

अक्सर अपने जमा और ऋण पोर्टफोलियो में imbalance होने के चलते बैंकों को तरलता की कमी का सामना करना पड़ता है. बैंकों में अचानक नकदी/तरलता की भारी कमी आ जाने पर MSF के माध्यम से RBI से धन उधार ले लिया जाता है. ये लोन short-term loan होते हैं जिन्हें सिर्फ एक दिन के लिया जाता है. 

इसे इस तरह से याद कर सकते हैं:–>>

  1. रेपो रेट = रिवर्स रेपो रेट + 1%
  2. MSF रेट= रेपो रेट + 1%

MSF के अंतर्गत कम-से-कम 1 करोड़ रूपये का लोन लिया जाता है. कोई भी बैंक RBI से अधिकतम उतना ही राशि का MSF ले सकता है जितना उसकी शुद्ध माँग और टर्म दायित्वों/Net demand and Time liabilities (NDTL) का 1% होता है. उफ़! यह तो टेक्निकल और थकाऊ लाइन मैंने कह दिया :p—- दूसरे शब्दों में कोई भी बैंक अधिकतम (maximum) अपने जमा एवं उधार की कुल राशि (total amount) का एक प्रतिशत ही ऋण ले सकता है. मतलब जितना बैंक का औकात है , उतने का 1% लोन ही ले सकता है. याद रहे कि बैंक के जमा (deposits) और उधार (borrowings) के योग को NDTL कहा जाता है.

MSF Rate में बढ़ोतरी क्या हमें प्रभावित करती है?

१. वही formula जो हमने रेपो रेट वाले पोस्ट में जिक्र किया है, यहाँ भी apply होता है. MSF rate के बढ़ जाने पर>> बैंक का RBI से लोन लेना महंगा पड़ेगा>>जिसका मतलब है कि आम आदमी या कॉर्पोरेट ऋण लेने वालों के लिए बैंक से ऋण लेना महंगा पड़ेगा.

२. जब लोगों के पास पैसे ही नहीं रहेंगे तो तरलता में कमी आएगी.

३. मुद्रा आपूर्ति (money-supply) को नियंत्रित करने के लिए RBI द्वारा अपनाए जाने वाले अन्य उपायों में से यह भी एक उपाय है.

About Sansar

संसार लोचन sansarlochan.IN ब्लॉग के प्रधान सम्पादक हैं. SINEWS नामक चैरिटी संगठन के प्रणेता भी हैं. ये आपको अर्थशास्त्र (Economics) से सम्बंधित अध्ययन-सामग्री उपलब्ध कराएँगे और आपके साथ भारतीय एवं विश्व अर्थव्यवस्था विषयक जानकारियाँ साझा करेंगे.

18 Responses to "MSF क्या होता है? Marginal Standing Facility in Hindi"

  1. sundram pandey   October 18, 2016 at 7:16 am

    Thanks sir…sir mere email pe 9 Oct ke bd ka koi post nhi aya sir.kyu sir plz bataiye

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    • Sansar Lochan   October 18, 2016 at 7:53 am

      क्या आप बता सकते हैं कि लास्ट New Post आपके मेल पर कौन-सा आया था?

      Reply
  2. Babita   October 22, 2016 at 9:38 pm

    Tanks a lot sir

    Reply
  3. Anonymous   December 2, 2016 at 12:15 am

    Thanks sir ji

    Reply
  4. sujay das   December 6, 2016 at 8:12 am

    Bank rate kya he…?

    Reply
  5. Gautam   December 19, 2016 at 2:59 am

    Thanks sir ji

    Reply
  6. amit sharma   January 4, 2017 at 2:56 pm

    sir you are amazing ,what a simple way of expressing these topics are brilliant hats off…..

    Reply
  7. Deep   January 13, 2017 at 9:05 am

    Sir open market operation k bare m bta do??

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  8. rahul   February 12, 2017 at 11:26 pm

    thanks sir

    Reply
  9. Anonymous   February 16, 2017 at 1:33 am

    thanks sir

    Reply
  10. ila tyagi   April 15, 2017 at 12:41 am

    sir please keep writing. you are an awesme blogger. the way you explained everything is just amazing. thank you so much

    Reply
  11. sumit jangir   April 16, 2017 at 7:21 pm

    Sir u explained it nicely
    Sir can u tell me how many types of bank are in India and wt their means

    Reply
  12. MOINUDDIN   April 18, 2017 at 11:10 pm

    Sir jis tarah aapne MSF ke bare me batatya isi tarah LAF ke bare me bhi bataye.

    Reply

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