भारत में जलवायु और वर्षा – Climate and Rainfall in Hindi

जलवायु (Climate) के अंतर्गत हम तापक्रम, हवाओं और वर्षा (Rainfall) की विभिन्न दशाओं और अनेक कारणों को पढ़ते हैं. आर्थिक भूगोल की दृष्टि से जलवायु का विशेष महत्त्व है. दरअसल, हर देश के आर्थिक स्थिति पर उस देश की जलवायु का कई प्रकार से प्रभाव पड़ता है. भारत (India) जैसे कृषि-प्रधान देशों पर जलवायु का जो प्रभाव पड़ता है वह किसी से छिपा नहीं है. सामान्यतः जलवायु का जो प्रभाव किसी देश के आर्थिक विकास पर पड़ता है, आज हम उसी की चर्चा इस पोस्ट में करेंगे.

भारत की जलवायु

भारत एक विशाल देश है. भारत के जलवायु को समझने के लिए उसकी स्थिति और प्राकृतिक दशाओं को भली-भांति ध्यान से समझना होगा. साथ-साथ वायुदाब, तापक्रम, हवाओं और वर्षा की दशाओं को भी समझना होगा. इन्हीं मौसमी दशाओं का अध्ययन हम जलवायु के अंतर्गत करेंगे.

  1. भारत 8° और 37° उत्तरी अक्षांशों के बीच स्थित है. कर्क रेखा उसके बीच से होकर गुजरती है. इस प्रकार लगभग आधा भाग उष्ण कटिबंध (Tropical Belt) में और उत्तर का शेष भाग समशीतोष्ण कटिबंध (Temperate zone) में आता है. परिणामस्वरूप, दक्षिणी भाग पूरे वर्ष लगभग एक-सा गरम बना रहता है मगर भारत का उत्तरी भाग गर्मियों में सूर्य के कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर चमकने के कारण, बहुत गरम और जाड़ों में जब सूर्य मकर रेखा पर चमकता है तो काफी ठंडा हो जाता है, यद्यपि प्राकृतिक दशाओं का भी प्रभाव पड़ता है.
  2. भारत विशाल एशिया महाद्वीप के दक्षिण-पूर्वी भाग में स्थित है. एशिया का उत्तरी भाग आर्कटिक वृत्त में होने से अत्यंत ठंडा है और बर्फ गिरा करती है. परन्तु अल्टाई पर्वतश्रेणी (Altai Mountain Range – mountain range in Central and East Asia) से लेकर हिमालय तक कई ऊँची-ऊँची लम्बी पर्वतीय दीवारें बीच में आ जाने के चलते भारत पर उन उत्तरी हवाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.
  3. भारत की स्थिति प्रायद्वीपीय (Peninsular) है. उत्तर में विशाल भू-भाग है और उसके दक्षिण में अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिन्द महासागर है. एशिया की दबाव की दशाओं का परिणाम यह होता है कि जाड़ों में हवाएँ स्थल की ओर से समुद्र की ओर चलती हैं और इसलिए शुष्क (dry) होती हैं. भारत में जाड़े की इन हवाओं का रुख उत्तर-पूर्वी (North-East) हो जाता है. गर्मियों में दबाव की दशाएँ बदल जाने से हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलने लगती हैं. इन हवाओं में नमी (humidity) होती है इसलिए ये हवाएँ वर्षा (rainfall) लाती हैं. भारत में गर्मियों की इन हवाओं का रुख प्रायः दक्षिण-पश्चिमी रहता है. मौसम की इन विशेषताओं के कारण भारत का जलवायु “मानसूनी जलवायु” कहलाता है. जाड़े की हवाओं को जाड़े का मानसून और गर्मियों की हवाओं को गर्मियों का मानसून कहा जाता है. .

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भारत में गर्मियों के हवाओं का रुख प्रायः दक्षिण-पश्चिमी और जाड़ों में प्रायः उत्तर-पूर्वी क्यों रहता है? इसी प्रकार बंगाल की खाड़ी से उठने वाला मानसून बंगाल के क्षेत्रों में वर्षा करके पश्चिम की ओर क्यों मुड़ जाता है अर्थात् उसका रुख पूर्व की ओर क्यों हो जाता है? इन प्रश्नों को स्पष्ट समझने के लिए हमें वायुदाब (हवा के दबाव) की दशाएं समझनी होंगी.

To be continued…

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