बिरसा मुंडा आन्दोलन – Birsa Munda Movement in Hindi

1857 ई. के बाद मुंडाओं ने सरदार आन्दोलन चलाया जो एक शांत प्रकृति का आन्दोलन था. पर इससे आदिवासियों की स्थिति में कोई ख़ास परिवर्तन नहीं आया. मुंडाओं ने आगामी आन्दोलन को उग्र रूप देने का निर्णय लिया. सरदार आन्दोलन के ठीक विपरीत बिरसा मुंडा आन्दोलन उग्र और हिंसक था. इस आन्दोलन के नेता बिरसा मुंडा (Birsa Munda), एक पढ़े-लिखे युवा नेता थे. यह आन्दोलन विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए शुरू किया गया था. इसलिए इसका स्वरूप भी मिश्रित था. यह आन्दोलन आर्थिक, राजनीतिक परिवर्तन और धार्मिक पुनरुत्थान जैसे विभिन्न उद्देश्यों को प्राप्त करने की इच्छा रखता था. चलिए पढ़ते हैं बिरसा मुंडा आन्दोलन (Birsa Munda Movement) के उद्देश्य, नेतृत्वकर्ता और परिणाम के बारे में in Hindi – –

बिरसा मुंडा आन्दोलन का आर्थिक उद्देश्य

बिरसा आन्दोलन का आर्थिक उद्देश्य था दिकू जमींदारों (गैर-आदिवासी जमींदार) द्वारा हथियाए गए आदिवासियों की कर मुक्त भूमि की वापसी जिसके लिए आदिवासी लम्बे समय से संघर्ष कर रहे थे. मुंडा समुदाय सरकार से न्याय पाने में असमर्थ रहे. इस असमर्थता से तंग आ कर उन्होंने अंग्रेजी राज को समाप्त करने और मुंडा राज की स्थापना करने का निर्णय लिया. वे सभी ब्रिटिश अधिकारीयों और ईसाई मिशनों को अपने क्षेत्र से बाहर निकाल देना चाहते थे. बिरसा मुंडा ने एक नए धर्म का सहारा लेकर मुंडाओं को संगठित किया. उनके नेतृत्व में मुंडाओं ने 1899-1900 ई. में विद्रोह किया.

बिरसा मुंडा का नेतृत्व

बिरसा मुंडा आदिवासियों की दयनीय हालत को देखकर उन्हें जमींदारों और ठेकेदारों के अत्याचार से मुक्ति दिलाना चाहते थे. बिरसा मुंडा (Birsa Munda) ने अनुभव किया था कि शांतिपूर्ण तरीकों से आन्दोलन चलाने का परिणाम व्यर्थ होता है. इसलिए उन्होंने इस आन्दोलन को उग्र बनाने के लिए अधिक से अधिक नवयुवकों को संगठित किया. मुंडाओं ने उन्हें अपना भगवान् मान लिया. उनका प्रत्येक शब्द मुंडाओं के लिए मानो ब्रह्मवाक्य बन गया. बिरसा मुंडा ने घोषणा की कि कोई भी सरकार को कर नहीं दे. मुंडाओं ने उनकी बातें मानी और पालन किया.

बिरसा मुंडा गिरफ्तार

1895 ई. में बिरसा मुंडा को विद्रोह फैलाने और राजविरोधी षड्यंत्र करने के अपराध में गिरफ्तार कर  लिया गया. उन्हें दो वर्ष की कैद की सजा मिली. जेल से रिहा होने के बाद वह और भी सक्रिय होकर और अधिक गर्मजोशी से आदिवासी युवाओं को आन्दोलन के लिए प्रेरित करने लगे. जंगल में छिपकर गुप्त सभाएँ आयोजित की जाती थीं और सभी को आन्दोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाता था. वे स्वयं महारानी विक्टोरिया के पुतले पर तीरों से वार करके तीरंदाजी का अभ्यास करते थे. बिरसा मुंडा आन्दोलन में कई निर्दोष लोगों की भी हत्या हुई जिनका कसूर सिर्फ इतना था कि वे सरकारी नौकर थे.

विद्रोह का दमन

1899 ई. में क्रिसमस के दिन मुंडाओं का व्यापक और हिंसक विद्रोह शुरू हुआ. सबसे पहले जो मुंडा ईसाई बने थे और जो लोग सरकार के लिए काम करते थे, उन्हें मारने का प्रयास किया गया लेकिन बाद में इस नीति में परिवर्तन किया गया क्योंकि अपना धर्म बदलने वाले मुंडा थे तो अपने ही समुदाय के! इसलिए उन्हें छोड़ सरकार और मिशनरियों के विरुद्ध आवाज़ उठने लगी. राँची और सिंहभूम में अनेक चर्चों में मुंडा आदिवासी समूह ने आक्रमण किया. पुलिस मुंडाओं के क्रोध का विशेष शिकार बनी. इस विद्रोह का प्रभाव पूरे छोटानागपुर में फ़ैल गया.

चिंतित होकर सरकार ने इस विद्रोह का दमन करने का निर्णय लिया. सरकार ने पुलिस और सेना की सहायता ली. मुंडाओं ने छापामार युद्ध का सहारा लेकर पुलिस और सेना का सामना किया लेकिन बन्दूक के सामने तीर-धनुष कब तक टिकती? फरवरी 1900 ई. में बिरसा एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिए गए. उन्हें राँची के जेल में रखा गया. उनपर सरकार ने राजद्रोह का मुकदमा चलाया. मुक़दमे के दौरान ही बिरसा मुंडा को हैजा हो गया और 9 जून, 1900 ई. को उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया.

परिणाम

बिरसा की मृत्यु के बाद बिरसा मुंडा आन्दोलन (Birsa Munda Movement) शिथिल पड़ गया. बिरसा के तीन प्रमुख सहयोगियों को फाँसी की सजा दी गई. अनेक मुंडाओं को जेल में ठूस दिया गया. परिणामस्वरूप बिरसा मुंडा आन्दोलन विफल हो गया. आदिवासियों को इस आन्दोलन से तत्काल कोई लाभ प्राप्त नहीं हुआ परन्तु सरकार को उनकी गंभीर स्थिति पर विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ा. आदिवासियों की जमीन का सर्वे करवाया गया. 1908 ई. में  ही छोटानागपुर काश्तकारी कानून (Chotanagpur Tenancy Act, 1908) पारित हुआ. मुंडाओं को जमीन सम्बंधित कई अधिकार मिले और बेकारी से उन्हें मुक्ति मिली. मुंडा समुदाय आज भी बिरसा को अपना भगवान् मानता है.

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3 Responses to "बिरसा मुंडा आन्दोलन – Birsa Munda Movement in Hindi"

  1. Richa   September 18, 2017 at 8:33 am

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  2. vijay Kumar mandavi   October 7, 2017 at 5:45 pm

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  3. vijay Kumar mandavi   October 7, 2017 at 5:47 pm

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